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मृत्यु के 7 साल बाद पुलिस ने दर्ज की एफआईआर.. अपोलो अस्पताल प्रबंधन बिलासपुर एवं डॉक्टर टीम पर किया गया मेडिकल नेगलीजेंस का अपराध दर्ज..
बिलासपुर– अपोलो प्रबंधन और डॉक्टरों की टीम की लापरवाही के वजह से हुई मौत के 7 साल बाद सरकंडा पुलिस ने अपोलो प्रबंधन और डॉक्टरों की टीम के खिलाफ एफआईआर दर्ज किया है.. 26.12.2016 को अपोलो अस्पताल बिलासपुर से एक मेमो प्राप्त हुआ जिसमें गोल्डी उर्फ गुरवीन छाबडा के द्वारा सल्फास पाईजनिंग से मृत्यु होने के संबंध में लेख था जिस पर थाना कोतवाली में मर्ग क्रमांक 45 / 2016 धारा 174 जाफौ कायम कर जांच किया गया, जांच के दौरान मृतक के परिजनों द्वारा अपोलो अस्पताल प्रबंधन एवं संबंधित डॉक्टरों द्वारा ईलाज में लापरवाही बरतने एवं गलत उपचार करने के संबंध में शिकायत प्रेषित किया गया जिसकी जांच हेतु स्वास्थ्य विभाग को लिखा गया था.. जांच में मृतक का पोस्ट मॉर्टम सिम्स अस्पताल बिलासपुर से कराया गया था, तथा जप्तशुदा प्रदर्शों का परीक्षण राज्य न्यायालयिक विज्ञान प्रयोगशाला रायपुर से कराया गया था.. मृत्यु के संबंध में संभागीय मेडिकल बोर्ड छत्तीसगढ़ आयुर्विज्ञान संस्थान बिलासपुर के मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट इस वर्ष फरवरी में प्राप्त हुई जिसमें विशेषज्ञों द्वारा अपोलो अस्पताल प्रबंधन एवं संबंधित डॉक्टरों द्वारा ईलाज के दौरान लापरवाही बरतने के संबंध में उल्लेख किया गया.. इस संबंध में डायरेक्टर संचालनालय मेडिकोलीगल संस्थान गृह (पुलिस) विभाग मेडिकोलीगल विशेषज्ञ एवं मेडिकोलीगल सलाहकार छत्तीसगढ़ शासन जेल रोड मेडिकल कालेज भवन रायपुर से इसके अतिरिक्त विशेषज्ञ जांच दिनांक 27.09.2023 को रिपोर्ट प्राप्त हुआ..
रिपोर्ट में विशेषज्ञ द्वारा डॉक्टर एवं अस्पताल प्रबंधन द्वारा लापरवाही किये जाने के संबंध में अलग-अलग बिन्दुओं पर उल्लेख किया गया है। इस प्रकार मर्ग जांच, मेडिकल बोर्ड, विशेषज्ञ की जांच रिपोर्ट के आधार पर मृतक गोल्डी उर्फ गुरवीन छाबडा की मृत्यु ईलाज के दौरान अपोलो अस्पताल प्रबंधन बिलासपुर एवं संबंधित डॉक्टरों की लापरवाही से होना पाये जाने से थाना सरकण्डा में अपराध क्रमांक 1342 / 2023 धारा 304ए भादवि के तहत् अपराध पंजीबद्ध किया गया। तथा अस्पताल प्रबंधन एवं संबंधित डॉक्टरों द्वारा ईलाज में लापरवाही करने के संबंध में जांच कर अग्रिम वैधानिक कार्यवाही की जा रही है..



