बिलासपुर

क्या राजनीतिक वर्चस्व की लड़ाई में फंस गया है बिलासपुर?.. शहर में पोस्टरवार से हर ज़ुबां में चर्चा का विषय.. जो हाथ किए थे कार्रवाई, अब शायद कांपने लगेंगे..

बिलासपुर– जिले में 5 साल पहले कांग्रेस की तत्कालीन सरकार में छत्तीसगढ़ की न्यायधानी बिलासपुर में पोस्टरवार की जंग छिड़ी हुई थी तब विपक्ष बिलासपुर को पोस्टरवार में फंसा हुआ बताते थे लेकिन 5 साल बाद एक बार फिर बिलासपुर में लोगों के बीच पोस्टरवार चर्चा का विषय बन गया है, दरअसल शहर में 2 दिनों पहले जिस तरह पार्टी के कार्यकर्ताओं ने बैनर पोस्टर टांगे हर कोई इसे शक्ति प्रदर्शन के रूप में देखने लगा, शहर के बुद्धिजीवियों का तो यह भी मानना है कि पिछले महीने स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर उसी पार्टी के कार्यकर्ताओं द्वारा लगाएं गए पोस्टर बैनर के जवाब में ताकत आजमाइश की गई है.. अब बिलासपुर जैसे जगह में चर्चा यहां तक पहुंच गई है कि, पार्टी के कार्यकर्ता पार्टी के नहीं चेहरे के लिए काम कर रहे है, दबदबे की लड़ाई खुलकर सड़क तक आने लगी है और इस लड़ाई में बिलासपुर फंसता हुआ नजर आ रहा है,

 

बिलासपुर शहर को स्मार्ट सिटी बनाने के लिए नगर निगम द्वारा आंखे टेढ़ते हुए कुछ माह पूर्व अवैध बैनर पोस्टर और होर्डिंग्स पर कार्रवाई का ऐलान किया गया, सरकंडा क्षेत्र में अवैध होर्डिंग्स से टकराकर एक युवक दुर्घटनाग्रस्त हो गया था, जिसके बाद नगर निगम ने अवैध बैनर पोस्टर अतिक्रमण हटाने के लिए बकायदा टीम का निर्माण किया, और शहर में एक युवक के जन्मदिन पर लगे बैनर पोस्टर को लेकर उस पर कार्रवाई की तलवार चला दी, इससे जनता में भी संदेश गया कि अब बिलासपुर बैनर पोस्टर से मुक्त होगा, लेकिन महीना भर बीतने के बाद ही नगर निगम गहरी नींद में चला गया और शहर 21 सितंबर से शहर भर के चौक चौराहों, ठेले खोमचो, लाइट पोलिंग, गार्डर, चौक में बने आइलैंड और बांस के सहारे सड़को पर बैनर पोस्टर टांगे गए और नगर निगम के हिम्मत को खुलेआम चुनौती दी गई, कार्रवाई करने वाले हाथों को भी पता हैं कि उनकी एक कार्रवाई उनके लिए मुसीबत का सबब बन सकती है, लिहाजा मौनव्रत का सहारा लेकर अधिकारी कर्मचारी भी कोना पकड़ लिए.. वहीं अगर किसी दूसरे का बैनर पोस्टर होता तो मजाल है किसी की, शहर की सुंदरता को बिगाड़ने का, नगर निगम उसको उल्टा टांग देती..

 

पोस्टरवार की सबसे अधिक चर्चा इसलिए भी है कि, पावर के साथ पद का टकराव शहर को किस दिशा में ले जाएगा, और आने वाले दिनों में कार्यकर्ताओं का चेहरा विशेष के लिए काम करना पार्टी को कितना फायदा या नुकसान पहुंचाएगा, क्योंकि पांच साल पूर्व भी इसी भंवर में बिलासपुर फंसा हुआ दिख रहा था, जिसके बाद चुनाव हुए और नतीजे सबके सामने है, क्या इस बार भी पोस्टरवार की वजह से चुनावी समीकरण में बदलाव आएगा और क्या 2023 की तरह पार्टी के लिए पोस्टरवार नुकसान देह साबित होगा..

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