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संविधान निर्माण से लेकर गणतंत्र दिवस तक : भारत की लोकतांत्रिक यात्रा के रोचक तथ्य..

संविधान और गणतंत्र दिवस से जुड़े कई ऐसे रोचक तथ्य हैं, जो हर भारतीय को जानना चाहिए..

डेस्क- भारत का संविधान केवल कानूनों का संकलन नहीं, बल्कि स्वतंत्र भारत की लोकतांत्रिक आत्मा है.. संविधान निर्माण की प्रक्रिया और गणतंत्र दिवस का इतिहास देश की संघर्षपूर्ण यात्रा, त्याग और संकल्प की कहानी कहता है। संविधान और गणतंत्र दिवस से जुड़े कई ऐसे रोचक तथ्य हैं, जो हर भारतीय को जानना चाहिए..


भारत के संविधान को तैयार करने में 2 वर्ष 11 माह 18 दिन का समय लगा.. संविधान सभा की पहली बैठक 9 दिसंबर 1946 को हुई थी, जबकि 26 नवंबर 1949 को संविधान को अंगीकृत किया गया..

संविधान मसौदा समिति के अध्यक्ष डॉ. भीमराव अंबेडकर ने सामाजिक न्याय, समानता और मौलिक अधिकारों को संविधान की आत्मा बनाया। उनकी दूरदर्शिता ने संविधान को समावेशी स्वरूप दिया..

भारतीय संविधान दुनिया का उन गिने–चुने संविधानों में शामिल है जो हस्तलिखित हैं, इसे प्रेम बिहारी नारायण रायजादा ने लिखा और इसके पन्नों को प्रसिद्ध चित्रकार नंदलाल बोस ने सजाया..

भारतीय संविधान विश्व का सबसे लंबा लिखित संविधान है। इसमें वर्तमान में 470 से अधिक अनुच्छेद, 12 अनुसूचियां और कई संशोधन शामिल हैं..

संविधान के विभिन्न प्रावधान विश्व के कई देशों से प्रेरित हैं—
• मौलिक अधिकार: अमेरिका
• संसदीय व्यवस्था: ब्रिटेन
• नीति निदेशक तत्व: आयरलैंड
• संघीय ढांचा: कनाडा

भारत का संविधान 26 जनवरी 1950 को लागू किया गया.. यह तारीख इसलिए चुनी गई क्योंकि 26 जनवरी 1930 को भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने पूर्ण स्वराज की घोषणा की थी। इसी ऐतिहासिक स्मृति को सम्मान देने के लिए 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस घोषित किया गया..

भारत का पहला गणतंत्र दिवस 1950 में दिल्ली के इरविन स्टेडियम (वर्तमान राष्ट्रीय स्टेडियम) में मनाया गया था, पहले राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने देश के पहले राष्ट्रपति के रूप में शपथ ली थी..

गणतंत्र दिवस पर होने वाली भव्य परेड देश की सैन्य शक्ति, सांस्कृतिक विविधता और एकता का प्रतीक है, यह परंपरा दशकों से भारत की पहचान बन चुकी है..

जहां 26 नवंबर को संविधान दिवस मनाकर नागरिकों को अधिकारों और कर्तव्यों की याद दिलाई जाती है, वहीं 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस भारत को संप्रभु, लोकतांत्रिक गणराज्य बनने का उत्सव है..

संविधान और गणतंत्र दिवस भारत की लोकतांत्रिक शक्ति के प्रतीक हैं, जो हर नागरिक को अधिकारों के साथ कर्तव्यों का भी बोध कराते हैं..

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