बिलासपुर– जिले में कुछ साल पहले बड़ा घोटाला उजागर हुआ था, जिसने प्रशासन की नींद उड़ा दी थी और विभागीय अधिकारियों को जमकर किरकिरी का सामना करना पड़ा था। इतना ही नहीं, मामले में एफआईआर तक कराई गई थी। लेकिन एक बार फिर घोटालों का सरताज वापस लौट रहा है और उसके लौटने से पहले ही सुगबुगाहट भी शुरू हो गई है कि इतना बड़ा कांड करने के बाद उसे फिर से दोहराने का आशीर्वाद कैसे मिल गया है..

दरअसल, सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन करने वाले हितग्राहियों को मुफ्त में चावल दिया जाता है, इसके लिए सरकार द्वारा पूरी व्यवस्था भी की गई है। लेकिन बिलासपुर जिले में कुछ साल पहले फर्जी राशन कार्ड बनाने, देर रात नाम जोड़ने और अलग करने के कांड का पर्दाफाश हुआ था। इतना ही नहीं, मामला सामने आने के बाद विभागीय अधिकारियों ने आरोपी की दो दुकानों को निलंबित करते हुए विक्रेता के खिलाफ एफआईआर भी दर्ज कराई थी, वहीं इस पूरे मामले में 1600 से अधिक फर्जी राशन कार्ड बनाने का सनसनीखेज मामला सामने आया था..
कुछ साल बीत जाने के बाद विभागीय सरपरस्ती में घोटाले का वह जिन फिर से जिंदा होने लगा है। इतना ही नहीं, उसे आयुष्मान होने का आशीर्वाद भी मिल रहा है। सूत्रों की जानकारी और विभागीय चर्चा तो यहां तक है कि एक अधिकारी को रिटायरमेंट से पहले विभागीय सेटलमेंट से अभयदान मिल गया है। हालांकि उसे अभी दुकान नहीं मिली है, लेकिन घोटालेबाज को दुकान देने की तैयारी की बात भी विश्वस्त सूत्रों द्वारा बताई जा रही है..
पिछले लंबे समय से अटैचमेंट में चल रही दुकानों को सेटिंग के जरिए एक-एक कर सलटाया जा रहा है, उसमें भी एक बिलासपुर रिटर्न विभागीय खिलाड़ी का नाम दबी जुबान से बताया जा रहा है, अब देखने वाली बात होगी कि शहर में खुलेआम चल रही पीडीएस चावल की अफरा-तफरी को लेकर आंख मूंदे अफसर किस तरह का रुख अपनाते हैं… या फिर संरक्षण के खेल में एक बार फिर जिंदा हुआ भ्रष्टाचार का जिन कब्र से बाहर आकर किस तरह जनता का चावल खाता है..
