खबर लगते ही दाढ़ीवाला दलाल हुआ सक्रिय, घर से हटाई गरीबों के चावल की बोरिया.. खाद्य विभाग की निष्क्रियता गरीबों पर भारी..

बिलासपुर- गरीबों के हक के चावल पर डाका डालने वाले दलालों की करतूत एक बार फिर सामने आई है। स्वतंत्र आवाज़ की खबर प्रसारित होते ही तारबाहर इलाके में रहने वाला दलाल बंटी, जिसे इलाके में लोग “दाढ़ी वाला दलाल” भी कहते हैं, हरकत में आ गया। कार्रवाई के डर से उसने अपने घर पर रखी चावल की बोरीयां आनन-फानन में हटाकर ठिकाना बदल दिया..

शहर में प्रमुख चावल दलालों में से एक बंटी लंबे समय से शासकीय उचित मूल्य की दुकानों से गरीबों का चावल दुकानदारों के माध्यम से एकत्रित करता है.. इसके बाद ये बोरीयां व्यापारियों और राइस मिलरों तक खपाई जाती हैं, यह धंधा इतने खुलेआम चलता है कि जानने पहचानने वाले लोग अब इसे राज़ की बात नहीं मानते.. मगर सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब आम जनता और स्थानीय मीडिया तक इसकी खबर है, तो खाद्य विभाग और निरीक्षक को क्यों दिखाई नहीं देता?, दरअसल, विभागीय निरीक्षकों की उदासीनता और संरक्षण का ही नतीजा है कि बंटी जैसे दलाल बेखौफ सक्रिय रहते हैं..
जानकारी के मुताबिक, यह पहला मामला नहीं है। करीब 6 साल पहले भी इस पर चावल चोरी और अफरा-तफरी के मामले में कार्रवाई हो चुकी है, लेकिन कुछ समय बाद मामला ठंडे बस्ते में चला गया। यही वजह है कि आज यह दलाल फिर से सक्रिय होकर गरीबों के हिस्से का राशन चट करने में जुटा है..

स्थानीय सूत्रों का कहना है कि यदि विभाग ईमानदारी से कार्रवाई करे, तो ऐसे दलालों की जड़ें शहर से उखाड़ फेंकी जा सकती हैं.. लेकिन सवाल यह है कि जब विभाग ही मौन है, तो दलालों को संरक्षण किससे मिल रहा है? जानकारों का साफ आरोप है कि दलाल से ज्यादा जिम्मेदार विभागीय अमला है, क्योंकि विभाग की खामोशी से ही गरीबों का अनाज खुलेआम काले बाजार में बिक रहा है..



