सड़क किनारे लगाया ठेला और शुरू हो गया देशी अहाता.. रोड पर बैठकर पीने की व्यवस्था परोस रहा चिंगराजपारा का देशी अहाता.. गाड़ियों और शराबियों को पकड़ने वाली पुलिस, अवैध अतिक्रमण को हटाने वाला नगर निगम, अहाता देने वाला आबकारी, रोड पर ठेले में अहाता चलाने वाला सब पर भारी.. करु हे, भारी करु हे..

बिलासपुर– शहर के चिंगराजपारा क्षेत्र में स्थित देशी शराब दुकान के सामने एक विचित्र स्थिति सामने आई है, जहां आबकारी विभाग द्वारा अहाता संचालन की स्वीकृति तो दी गई है, लेकिन निर्धारित जगह नहीं होने के कारण ठेकेदार खुलेआम सड़क पर ठेला लगाकर चखना परोस रहा है और शराब पिलाई जा रही है और बकायदा ठेले के सामने देशी अहाता का बोर्ड भी लगाया गया है..

गौरतलब है कि, प्रदेश में देशी विदेशी शराब दुकानों के साथ अहाता संचालन की अनुमति आबकारी विभाग द्वारा दी जाती है.. चिंगराजपारा में स्थित देशी शराब दुकान में भी अहाता संचालन का ठेका मिला है, लेकिन उचित स्थान के अभाव में ठेकेदार ने इसका “जुगाड़ू” हल निकालते हुए सड़क किनारे ठेला खड़ा कर दिया है, यहीं लोगों को बैठाकर शराब परोसी जा रही है, जो न सिर्फ ट्रैफिक व्यवस्था को प्रभावित कर रहा है, बल्कि सार्वजनिक सुरक्षा के लिहाज से भी गंभीर चिंता का विषय बन चुका है.. आस पास घनी बस्ती मौजूद है इसके बावजूद भी शराबियों का जमावड़ा सुबह से लेकर शाम तक सड़क पर बना रहता है..
खुलेआम शराब सेवन, प्रशासन की चुप्पी, पुलिस का प्रहार गायब..
एक तरफ पुलिस सार्वजनिक जगहों पर शराब पीने वालों और शराब पीकर वाहन चलाने वालों पर सख्ती से कार्रवाई कर रही है, दूसरी ओर सरकंडा थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाला इस इलाके में सड़क पर ही शराब पीने की इस व्यवस्था पर कोई रोक नहीं लगाई जा रही है, आबकारी विभाग की स्वीकृति भले ही हो, लेकिन संचालन की जगह पर स्पष्ट नियम और दिशा-निर्देश होते हैं, सार्वजनिक सड़क पर अहाता संचालित करना नियमों का खुला उल्लंघन है..
स्थानीय लोग परेशान, कार्रवाई की मांग..
नाम न लिखने की शर्त पर स्थानीय नागरिकों का कहना है कि, रोजाना शराब पीने वालों की भीड़ लगती है, जिससे आवाजाही में दिक्कतें आती हैं और आए दिन हंगामे की स्थिति बनती है, नागरिकों ने प्रशासन से मांग की है कि या तो अहाते के लिए वैकल्पिक सुरक्षित जगह निर्धारित की जाए, या फिर इस अव्यवस्थित और अस्थायी व्यवस्था पर तत्काल रोक लगाई जाए..
प्रशासन की जिम्मेदारी तय होनी चाहिए..
इस मामले ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या ठेके देने से पहले जगह का निरीक्षण नहीं किया गया? और अगर जगह नहीं थी तो अहाते की अनुमति कैसे दी गई? अब देखना होगा कि, आबकारी विभाग और नगर प्रशासन इस पर क्या कदम उठाते हैं..




