सितम्बर में जारी हुई थी नोटिस.. 3 दिनों के भीतर देना था जवाब.. संचालन समिति की मनमर्जी के सामने बेबस विभाग.. जनता राशन के लिए कर रही त्राहिमाम.. उस्लापुर राशन दुकान में शॉर्टेज, नोटिस और दादागिरी का खेल..
3 दिनों में जबाव पेश करने के नोटिस के बाद भी दुकान संचालक समिति और विक्रेता लगभग 2 महीने बीतने के बाद भी जवाब देना जरूरी नहीं समझ रहे है..

बिलासपुर– नगर निगम के अंतर्गत आने वाले वॉर्ड क्रमांक 3 साईं नगर उस्लापुर अमेरी में स्थित शासकीय उचित मूल्य दुकान संचालक द्वारा जमकर भर्राशाही चलाया जा रहा है जहां एक ओर वार्ड की जनता को दुकान संचालक से राशन के लिए मिन्नते मांगनी पड़ती है, दूसरी ओर नोटिस जारी करने के बाद भी विभागीय अधिकारी कार्रवाई न करने के लिए बेबस नजर आ रहे है.. इसलिए तो 3 दिनों में जबाव पेश करने के नोटिस के बाद भी दुकान संचालक समिति और विक्रेता लगभग 2 महीने बीतने के बाद भी जवाब देना जरूरी नहीं समझ रहे है..

दरअसल खाद्य विभाग द्वारा पूर्व में दूकान क्रमांक 401001120 संगवारी मिलन जन कल्याण समिति में जांच के बाद भारी अनियमितता पाई गई थी जिसके बाद खाद्य विभाग ने कार्रवाई करते हुए खाद्य अधिकारी ने दुकान को निलंबित कर दिया था, लेकिन माननीय उच्च न्यायालय ने प्राकृतिक न्याय सिद्धांत के मद्देनजर निलंबन को बहाल करने का आदेश जारी कर दिया था लेकिन दुकानदार वसीम बेग द्वारा शासकीय उचित मूल्य दुकान में भर्राशाही जारी रखा गया, विक्रेता की कार्यप्रणाली में भारी लापरवाही की शिकायत लगातार दुकान में पहुंच रही थी जिसके बाद एक बार फिर खाद्य निरीक्षक और सहायक खाद्य अधिकारी की टीम 10 अगस्त 2025 को जांच के लिए दुकान पहुंची, जहां उन्हें 122 क्विंटल पीडीएस चावल, 3.99 क्विंटल और 1.52 क्विंटल नमक (कमी) शॉर्टेज पाया गया, जिसके बाद संगवारी मिलन जन कल्याण समिति उस्लापुर, अध्यक्ष जुबेदा खान, सचिव स्तर बेगम विक्रेता वसीम बेग को 13 सितंबर 2025 को नोटिस जारी 3 दिवस के भीतर जवाब मांगा गया, भारी अनियमितता के साथ दुकान का संचालन करने वाले वसीम बेग की इतनी हिमाकत है कि उसने लगभग 2 माह गुजरने के बाद ही नोटिस का जवाब देना जरूरी नहीं समझा..

वार्ड नंबर 3 उस्लापुर में रहने वाले स्थानीय लोगों का आरोप है कि, उन्हें बीते कई महीने से शक्कर नहीं दिया जा रहा है इतना ही जिन्हें शक्कर दिया जाता है उनसे भी 20 रुपए वसूले जाते है, गरीब जनता को शक्कर के लिए अपनी मेहनत की कमाई से 3 रुपए अधिक देने पड़ते है, भले ही यह राशि छोटी लगे, लेकिन हजारों की संख्या में कार्डधारी पिछले कई महीनों से मजबूरन शक्कर पाने के लिए अतिरिक्त पैसे दे रहे है..

बता दें कि, उस्लापुर शासकीय उचित मूल्य दुकान को एक कमरे में संचालित किया जा रहा है और न तो दुकान के बाहर संचालन समिति की जानकारी अंकित की गई है और न ही जनता को राशन वितरण करने की कोई व्यवस्था बनाई गई है.. दुकान के विक्रेता वसीम बेग (बाबा) द्वारा एक कर्मचारी चांद वर्मा को काम पर रखा गया है जिसे न तो संचालन समिति का नाम पता है और न ही शासकीय उचित मूल्य दुकान के नियम की और वितरण व्यवस्था की जानकारी है इतना ही नहीं कर्मचारी द्वारा राशन लेने आएं गरीब लोगों से हुज्जतबाजी की जाती है, स्थानीय लोगों का आरोप है कि, विक्रेता द्वारा शक्कर को 17 रुपए के दर से नहीं बल्कि 20 रुपए की दर से दी जा रही हैं, बचे हुए पैसे मांगने पर चिल्हर नहीं है बोलकर रख लिया जाता है,

वहीं जब शासकीय उचित मूल्य दुकान के संचालक के कर्मचारी से पूछा गया तो पहले तो वह बात करने और जानकारी देने से मना करता रहा फिर स्थानीय लोगों के दबाव के बाद उसने कहा कि वह पिछले 2 महीने से राशन का वितरण करने आ रहा है उसे शासकीय उचित मूल्य की दुकान के संचालक वसीम खान (बाबा) द्वारा रखा गया लेकिन मेहनताना कितना देगा यह नहीं बताया है, इतना ही नहीं उस कर्मचारी को दुकान की संचालन समिति की जानकारी भी नहीं है, और वह चावल वितरण के नियमों से भी अनभिज्ञ है,

ऐसे में सवाल उठता है कि, 13 सितंबर को जारी की गई नोटिस का 2 महीने पूरे हो जाने के बाद भी संचालन समिति द्वारा जबाव नहीं देने कार्रवाई क्यों नहीं की गई, लगातार मीडिया, स्थानीय और जनप्रतिनिधियों से शिकायत किए जाने पर कोई एक्शन क्यों नहीं लिया जाता है, क्या दुकानदार को विभागीय अधिकारी, रसूखदार या फिर राजनीतिक संरक्षण प्राप्त है कि विभागीय अधिकारियों की हिम्मत कार्रवाई के लिए नहीं हो रही है.. या फिर संरक्षण के खेल में कोई बराबर का हिस्सेदार भी है जो जनता उनके हित और सरकार की महत्त्वाकांक्षी योजना की मिट्टीपलिद करने से पीछे नहीं हट रहा है..



