बिलासपुर

शराब दुकान के कर्मचारियों को नियुक्त करने वाली कंपनी कैप्सटन के नियुक्ति प्रबंधक, फील्ड अफसर समेत कई के खिलाफ गंभीर आरोप.. हर माह वसूली की आबकारी मंत्री से हुई शिकायत..

ठेका संचालन करने वाली कंपनी और उसके नियुक्त प्रबंधक विनेक सागर, फील्ड ऑफिसर रविकांत कुर्रे सहित अन्य अधिकारी कर्मचारियों से हर महीने जबरन रुपये वसूलने की शिकायत..

बिलासपुर– जिले की शराब दुकानों में कार्यरत कर्मचारियों ने आबकारी विभाग और कंपनी अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाए हैं, कर्मचारियों ने छत्तीसगढ़ शासन के आबकारी मंत्री को ज्ञापन सौंपकर बताया कि, ठेका संचालन करने वाली कंपनी और उसके नियुक्त प्रबंधक विनेक सागर, फील्ड ऑफिसर रविकांत कुर्रे सहित अन्य अधिकारी कर्मचारियों से हर महीने जबरन रुपये वसूल रहे हैं और विरोध करने वालों को नौकरी से निकालने की धमकी दी जा रही है..

हर माह 1000 से 2000 रुपये तक की वसूली..

कर्मचारियों ने शिकायत में आरोप लगाया है कि, प्रत्येक कर्मचारी से प्रतिमाह 1000 से 2000 रुपये तक की अवैध वसूली की जा रही है, यदि कोई कर्मचारी पैसे नहीं देता, तो उसे ड्यूटी से बाहर कर दिया जाता है या किसी न किसी बहाने से नौकरी से हटा दिया जाता है..

रात की ड्यूटी में सोने पर बर्खास्तगी..

पत्र में कहा गया है कि, यदि कोई कर्मचारी बारह घंटे ड्यूटी में लंच के दौरान कुछ देर आराम कर ले या सो जाए, तो कंपनी अधिकारी उसे तुरंत नौकरी से निकाल देते हैं, इसके अलावा, अगर कोई कर्मचारी किसी कारणवश दुकान से बाहर चला जाए तो 15 से 20 हजार रुपये का जुर्माना लगाया जाता है..

नई नियुक्तियों में भी वसूली का आरोप..

आबकारी मंत्री को सौंपे गए शिकायत में कर्मचारियों का कहना है कि, नई नियुक्ति या ट्रांसफर के लिए भी भारी रिश्वत ली जा रही है, एक नए सुपरवाइजर की भर्ती के लिए ₹2,20,000 तक लिए जा रहे हैं, जबकि पुराने कर्मचारियों से छोटी गलती पर 1 लाख से अधिक की वसूली की जा रही है..

सेल्समैन से 1 लाख से अधिक की मांग का आरोप..

शिकायत में बताया गया है कि, कभी कभार दुकान से कर्मचारियों द्वारा काम से दुकान के बाहर जाने पर कार्रवाई का डर दिखाकर और नौकरी निकालने का खौफ़ दिखाकर दुकानों में सेल्समैन से 1 से 1.20 लाख रुपये की मांग की जा रही है, अगर कर्मचारी पैसे देने से इनकार कर देते हैं, तो उन्हें दूसरे दुकान पर स्थानांतरित कर दिया जाता है या नौकरी से हटा दिया जाता है..

पत्र में आबकारी विभाग के अधिकारी पर उदासीनता का आरोप..

कर्मचारियों ने पत्र में लिखा है कि कंपनी के अधिकारियों की मिलीभगत आबकारी विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों से है, शिकायत में अधिकारी पर भी संरक्षण देने का आरोप लगाया गया है, कर्मचारियों का कहना है कि भ्रष्टाचार में हिस्सेदारी के कारण उनकी शिकायतों को दबाया जा रहा है,

आबकारी मंत्री से निष्पक्ष जांच की मांग..

शिकायतकर्ताओं ने आबकारी मंत्री से मांग की है कि इस पूरे मामले की स्वतंत्र जांच कराई जाए, ताकि ईमानदारी से काम कर रहे कर्मचारियों को न्याय मिल सके, उन्होंने कहा कि, 67 दुकानों में कार्यरत अधिकांश कर्मचारी इस अवैध वसूली से परेशान हैं और प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप की अपेक्षा कर रहे हैं..

कई कर्मचारियों द्वारा एक साथ मिलकर आबकारी मंत्री को दिए गए गंभीर शिकायत पर आबकारी मंत्री ने सचिव आबकारी को मामले में जांच कर आवश्यक कार्रवाई करने की निर्देश दी है.. अब बड़ा सवाल उठता है कि, कई सुपरवाइजरों और सेल्समैन और मल्टी की शिकायत पर शासन कितनी सख्त होती है और जांच कर जिम्मेदारों पर कार्रवाई करती है, या फिर पूर्व सरकार की तरह मिलीभगत और अंधाधुन संरक्षण का खेल निरंतर चलता रहता है..

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