बिलासपुर

मामला खुलेगा तो दूर तक जाएगा.. जिसे आईपीएस ने पकड़ा था रंगे हाथ, उसे विभाग ने दे दी क्लीनचिट.. मौके पर अफरा तफरी करने वाले दुकानदार ने जिसे बताया था अपना चावल, विभागीय जांच में पहचानने से कर दिया इंकार.. पीडीएस चावल मामले में सेंटिंग की चर्चा जोरो पर..

बिलासपुर– जिले में पीडीएस चावल की अफरा तफरी कर जनता और शासन की महत्वाकांक्षी योजना पर पतीला लगाने वालों का मामला आएं दिन उजागर होता है लेकिन शहर में चावल की अफरा तफरी के जांच के मामले दुकानदार का पुलिस की नोटिस में जवाब और विभागीय जांच के बयान की तुलना की जाएं तो माथा चकराना लाजमी है..

मामला अक्टूबर माह का है जब शहर में स्थित दुकान में सीएसपी कोतवाली आईपीएस गगन कुमार ने छापेमार कार्रवाई करते हुए 44 बोरे में भरे पीडीएस चावल को बारदाने से प्लास्टिक चावल में पलटते हुए पकड़ा, जिसके बाद पुलिस ने नोटिस जारी करते हुए दुकान संचालक को नोटिस जारी कर जवाब मांगा, जिस पर शासकीय उचित मूल्य दुकान संचालक ने जवाब दिया कि, शासकीय उचित मूल्य दुकान का संचालन और वितरण उसके द्वारा किया जाता है, शासकीय उचित मूल्य दुकान का भवन जर्जर हो जाने के कारण वहां सीपेज की समस्या रहती है इसलिए सार्वजनिक वितरण किए जाने वाले पीडीएस चावल को दुकान के सामने स्थित भवन पर रख दिया था, और अफरा तफरी में पकड़ाने वाला चावल वितरण के लिए लाया गया था..

इधर कुछ दिनों बाद अफरा तफरी के मामले में खाद्य निरीक्षक मंगेश कांत और सहायक खाद्य अधिकारी राजीव लोचन तिवारी द्वारा दुकान में पहुंचकर भौतिक सत्यापन किया गया और दिनांक 11-11-2025 को जांच रिपोर्ट कोतवाली पुलिस को प्रेषित कर दी गई..

12 अक्टूबर 2025 को हुई कार्रवाई के बाद शासकीय उचित मूल्य दुकान के विक्रेता का विभागीय अधिकारियों को दिया गया बयान और क्वालिटी इंस्पेक्टर की रिपोर्ट मामले को संदेह के घेरे में ले जाती है.. क्योंकि मौके पर पकड़ाने वाले ने विभागीय अधिकारियों को उलट बयान दिया, जिसमें उन्होंने कहा है कि, पुलिस द्वारा भवन में कार्रवाई की गई थी वहां लगे भीड़ को देखकर वह भवन में गया था तब मौके पर मौजूद पुलिस ने उसे पकड़ लिया और उसने पुलिस के दबाव और डर में उसने मौके पर जप्त चावल को अपना बता दिया,

दुकानदार ने पुलिस को नोटिस के जवाब में यह भी कहा कि, भवन जर्जर होने की वजह से और सीपेज से बचाने के लिए चावल को दुकान से हटाकर भवन में रखा गया था.. जबकि विभागीय जांच के दौरान वह कर गया और मौके पर उपलब्ध चावल को पहचानने से इंकार कर दिया..

 

वहीं जब जप्त चावल को कोतवाली थाने लाया गया तो उसके साथ खाली बोरियो को भी लाई गई जिसमें बोरी में FRK चावल होने का लिखा गया है, लेकिन दूसरी ओर क्वालिटी इंस्पेक्टर अमित कुमार सिन्हा द्वारा चावल में FRK की जांच की गई और रिपोर्ट में FRK मिक्स नहीं होना बताया गया है.. अब सवाल उठता है कि, जप्त चावल का बोरा खुद ही FRK चावल को प्रमाणित कर रहा है तो क्वॉलिटी इंस्पेक्टर की रिपोर्ट में विक्रेता को पाक साफ कैसे साबित कर दिया गया..

विभागीय जांच रिपोर्ट में साफ साफ लिखा है कि, जांच के दौरान दुकान के अंदर सार्वजनिक वितरण प्रणाली के लिए मिलने वाले पीडीएस चावल का स्टॉक बराबर मात्रा में मौजूद था इतना ही नहीं नमक और शक्कर का स्टॉक भी बराबर है, लेकिन छापे के दौरान बड़ी संख्या में पकड़ाया जाने वाला चावल किसका है और कहां से आया.. अगर वह दुकानदार का चावल नहीं था तो उसने किसके भय में पुलिस की छापेमारी के दौरान पब्लिक के बीच पकड़े गए चावल को अपना बताया था..

बिलासपुर पुलिस की छापेमार कार्रवाई के दौरान पकड़े गए चावल के साथ बारदाने में 50 कट्टी चावल और भी थी, जिसे विक्रेता ने वितरण का चावल बताया था और पुलिस ने सरकारी बारदाने में होने की वजह से उसे छोड़ दिया था और सफेद प्लास्टिक बोरी में पलटे गए पीडीएस चावल को जप्त किया था, जिसका वीडियो मौके पर पहुंचे मीडियाकर्मियों ने बनाया था.. उस मामले को जांच में शामिल ही नहीं किया गया, दूसरी ओर पुलिस के भवन से निकलने के बाद उसे वापस दुकान में रख दिया गया था.. बड़ी बात है कि विभागीय अधिकारियों ने पुलिस के नोटिस में मिले जवाब को जांच में शामिल नहीं किया और सिर्फ दुकान में स्टॉक की जांच कर छापेमार कार्रवाई में पकड़ाने वाले विक्रेता को निर्दोष घोषित कर दिया गया..

सरकार की महत्वाकांक्षी योजना सार्वजनिक वितरण प्रणाली को जनता तक पहुंचाने और उसके उपयोग के लिए केंद्र सरकार और राज्य सरकार जितनी गंभीरता से काम कर रही है उतना ही लापरवाही विभाग बरत रही है जिससे खुलेआम शहर में पीडीएस चावल की अफरा तफरी करने वाला सिंडिकेट एक्टिव होकर काम कर रहा है.. इसी का नतीजा है कि शासकीय उचित मूल्य दुकान के सामने गोदाम में पीडीएस चावल की अफरा तफरी को आईपीएस गगन कुमार द्वारा रंगे हाथ पकड़ने के बावजूद विभागीय जांच में उसे निर्दोष साबित कर दिया गया जबकि पकड़े जाने पर पुलिस ने जो नोटिस दुकान विक्रेता को दिया था उसके जवाब में उसने वितरण के चावल की अफरा तफरी की बात स्वीकारी थी, चावल को दुकान की जगह भवन में रखने की दलील दी थी..

आखिरी और अंतिम संदेह, पूरे मामले में खाद्य विभाग द्वारा जो प्रतिवेदन कोतवाली पुलिस को भेजा गया है उसमें साफ साफ चावल को सार्वजनिक वितरण प्रणाली का चावल होने से इंकार किया है.. तो अब सवाल उठता है कि, ठीक शासकीय उचित मूल्य दुकान के सामने स्थित भवन में सरकारी पीडीएस चावल आया कहां से, वो भी सरकारी जुट का बोरा वाला चावल और प्लास्टिक बोरे के पास जूट के बोरे में कई कट्टी में रखा पीडीएस का चावल पुलिस के जाने के बाद कहां गया, जिस जप्त बोरे में FRK लिखा है तो फिर उस चावल की सैंपलिंग रिपोर्ट में FRK न होना कैसे बताया गया.. और पंजी संधारण न होने दुकान में बोर्ड लगा न होने, केवाईसी को लेकर जब दुकानों को सस्पेंड कर दिया जाता है तो चावल चोरी और अफरा तफरी में रंगे हाथ पकड़ाने के बाद संचालित दुकान को सस्पेंड क्यों नहीं किया गया..

बड़ा सवाल यह उठता है कि, पीडीएस चावल की अफरा तफरी को लेकर विभागीय अधिकारी गंभीर नजर क्यों नहीं आते है, शासन की महत्वाकांक्षी योजना पर पलीता लगाने वाले लोगों पर कार्रवाई क्यों नहीं की जाती है.. जनता के पेट का हक और शासन की महत्वाकांक्षी योजना को नुकसान पहुंचाकर जो सिंडिकेट चावल की अफरा तफरी में एक्टिव है उसे रोकने का प्रयास क्यों नहीं किया जा रहा है, क्या कोतवाली पुलिस को दुकानदार द्वारा दिए गए बयान को जांच में लेना विभागीय अधिकारियों ने जरूरी नहीं समझा, और विभाग और पुलिस के रिपोर्ट में इतनी असमानता क्यों है, दुकानदार द्वारा विभाग और पुलिस को जमीन आसमान के अंतर वाले बयान क्यों दिए गए है.. और क्या इसे लेकर फिर से जांच की जाएगी..

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