पुण्यतिथि 27 मार्च, संत श्री सीताराम भगत का जीवन सेवा, शिक्षा और त्याग का प्रेरणादायी उदाहरण..
बिलासपुर– 27 मार्च को संत स्व. श्री सीताराम भगत की पुण्यतिथि के अवसर पर उनके व्यक्तित्व एवं कृतित्व को याद किया जा रहा है.. स्व. श्री सीताराम भगत का जन्म 12 फरवरी 1906 को बिहार के रोहतास जिला अंतर्गत ग्राम पकड़िया में हुआ था, वे बचपन से ही सत्यनिष्ठ, सेवाभावी और अतिथि सत्कार के लिए जाने जाते थे, मिडिल परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद उन्होंने चांप प्राथमिक विद्यालय में शिक्षक के रूप में अपनी सेवा प्रारंभ की..
सन 1921-22 के दौरान उन्होंने अपने ग्राम पकड़िया में शिक्षा के प्रसार के लिए विशेष प्रयास किए और अपने अथक परिश्रम से एक प्राथमिक विद्यालय की स्थापना करवाई। शिक्षा के साथ-साथ विद्यार्थियों के आध्यात्मिक एवं नैतिक विकास के लिए उन्होंने विद्यालय के साथ मंदिर, तालाब एवं वाटिका का निर्माण भी कराया, जो उनके शिक्षा प्रेम और समाज सेवा की भावना को दर्शाता है।
स्व. सीताराम भगत केवल शिक्षक ही नहीं बल्कि उच्च कोटि के संत स्वभाव के व्यक्ति थे। उन्हें खेलकूद, घुड़सवारी और गोपालन में विशेष रुचि थी। वे विद्यार्थियों को पढ़ाई के साथ-साथ खेलकूद के लिए भी प्रेरित करते थे और स्वयं भी अनुशासन एवं सादगी का जीवन जीते थे।
उन्होंने अपने जीवन का प्रत्येक क्षण ग्राम पकड़िया की पाठशाला और श्री महावीर मंदिर की सेवा में समर्पित कर दिया। उनकी कार्यशैली से अधिकारी वर्ग भी अत्यंत संतुष्ट रहता था। सन 1962 में सेवानिवृत्ति का समय आने पर अधिकारियों के अनुरोध पर उन्होंने पाँच वर्ष और सेवा दी, जो उनकी कर्तव्यनिष्ठा का प्रमाण है।
बाद में उन्होंने वैष्णव परंपरा को अपनाया और समाज सेवा के कार्यों में पूर्ण रूप से लग गए। उन्होंने विद्यालय के लिए अपनी भूमि दान में दी तथा पुनः “पकड़िया सीताराम माध्यमिक विद्यालय” के निर्माण के लिए भी भूमि दान कर उदारता का परिचय दिया।
27 मार्च 1972 को ग्राम पकड़िया (जिला रोहतास, बिहार) स्थित मंदिर परिसर में उन्होंने अपने नश्वर शरीर का त्याग किया और सदैव के लिए अमर हो गए। आज भले ही वे हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनका संपूर्ण जीवन कर्तव्यनिष्ठा, सेवा, त्याग और समाज के प्रति समर्पण की प्रेरणा देता है..
