बिलासपुर– जिले में बोर खनन को लेकर प्रशासन द्वारा स्पष्ट प्रतिबंध लगाया गया है, खासकर गर्मी के मौसम में भूजल स्तर को बचाने के लिए सख्ती बरतने के निर्देश दिए जाते हैं। इसके बावजूद हकीकत यह है कि बोर खनन की गाड़ियां बेखौफ होकर सड़कों पर दौड़ रही हैं और नियमों की खुलेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं.. हर वर्ष गर्मी के दिनों में इस तरह के मामले सामने आते हैं, लेकिन इसके बाद भी जिम्मेदार विभाग ठोस कार्रवाई करने में नाकाम नजर आता है। इस साल भी हालात जस के तस हैं, जिससे यह साफ है कि प्रतिबंध केवल कागजों तक सीमित रह गया है..

ताजा मामला तब सामने आया जब ग्राम देवकीरारी निवासी धर्मेंद्र कुमार पात्रे ने कलेक्टर को शिकायत देकर बताया कि उनकी बोर गाड़ियां सड़क किनारे खड़ी थीं, इसी दौरान पेट्रोलिंग टीम पहुंची और कार्रवाई का डर दिखाकर भारी रकम की मांग की गई, लेकिन इस पूरे मामले का एक और गंभीर पहलू यह है कि प्रतिबंध के बावजूद बोर खनन की गाड़ियां सड़कों पर क्यों चल रही थीं? यह सीधे तौर पर नियमों की अनदेखी और सिस्टम की कमजोरी को उजागर करता है..

गौरतलब है कि पूर्व वर्षों में प्रशासन ने बोर खनन करने वाली गाड़ियों में GPS सिस्टम अनिवार्य करने का आदेश दिया था, ताकि उनकी गतिविधियों पर नजर रखी जा सके। लेकिन जमीनी स्थिति यह है कि अधिकांश संचालकों ने इस नियम का पालन तक नहीं किया और बिना किसी निगरानी के ही गाड़ियां संचालित हो रही हैं..विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की लापरवाही से न केवल अवैध खनन को बढ़ावा मिलता है, बल्कि भूजल स्तर पर भी गंभीर असर पड़ता है..

अब सवाल यह उठता है कि:

  • प्रतिबंध के बावजूद बोर खनन कैसे जारी है?
  • GPS नियम का पालन क्यों नहीं किया जा रहा?
  • जिम्मेदार अधिकारी कार्रवाई करने से क्यों बच रहे हैं?

इस पूरे मामले ने प्रशासनिक व्यवस्था की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं, जरूरत है कि केवल शिकायत की जांच तक सीमित न रहकर, जिले में संचालित सभी बोर खनन गतिविधियों की व्यापक जांच कराई जाए और नियमों का उल्लंघन करने वालों पर सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाए, अगर समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले समय में स्थिति और भयावह हो सकती है..