बिलासपुर

स्वतंत्र आवाज़ की खबर का असर- मां नारायणी राइस मिल की जांच के लिए टीम गठित, भौतिक सत्यापन करने वाली सहायक खाद्य अधिकारी जांच टीम में भी, क्या एक मिल 2 यूनिट की आड़ में चल रहा है रिसाइकिलिंग का खेल..

बिलासपुर– जिले में धान खरीदी अब अपने अंतिम दौर में पहुंच चुकी है.. ऐसे में धान खरीदी केंद्रों में रखे धान को मिल तक पहुंचाने के लिए प्रशासन लगातार प्रयासरत है, लेकिन जिले के बिल्हा में स्थित मां वैष्णवी राइस मिल के संचालक द्वारा पुराने राइस मिल के द्वारा ही नए पंजीयन के साथ कस्टम मिलिंग की जा रही है, पिछली खबर में हमने आपको जानकारी देते हुए बताया था कि बिलासपुर के बिल्हा ब्लॉक के केसला में स्थित एक राइस मिल के संचालक अमित मित्तल द्वारा 2024-25 में धान की खरीदी की गई थी, लेकिन शासन को कुल खरीदी का कम से कम 50% धान जमा करना था और वह संचालक धान जमा नहीं कर पाया.. लेकिन मिलर ने इस वर्ष धान खरीदी के लिए उसी प्रांगण में स्थित कोढ़हा मिल को राइस मिल में तब्दील कर शासन की आंखों में धूल झोंकते हुए विभागीय सेटिंग से दूसरा पंजीयन प्राप्त कर लिया और फिर से धान का उठाव शुरू कर दिया है.. मजेदार बात यह है कि, पिछले वर्ष के बकाया चावल को वह इस वर्ष में लिए धान से पूर्ति करने में जुट गया है ताकि उसे पुराने पंजीयन में धान जमा करने का अधिकार फिर से प्राप्त कर सकें..

बिल्हा के केसला में स्थित मां नारायणी राइस मिल के संचालक को 2024-25 में 97 लॉट चावल जमा करना था लेकिन अब तक उसके द्वारा 41 लॉट जमा किया गया है, ऐसे में उसे इस वर्ष कस्टम मिलिंग के लिए पंजीयन नहीं मिला तो उसने बिना किसी स्टेबलिशमेंट और व्यवस्था के परिसर में स्थित कोढ़हा मिल को राइस बताकर दूसरा पंजीयन प्राप्त कर लिया.. वर्ष 2024-25 में मां नारायणी राइस प्रोडक्ट का पंजीयन क्रमांक 407617001 था जिसके तहत उसे नवंबर से (नए पंजीयन) से पहले कुल मात्रा का कम से कम 50% चावल जमा करना था लेकिन मिलर द्वारा अब तक जमा नहीं किया गया है.. दूसरी मिलर को यह समझ आ गया था कि, उसे इस वर्ष कस्टम मिलिंग का पंजीयन नहीं मिलेगा, तो उन्होंने परिसर में स्थित कोढ़हा मिल को राइस मिल बताकर नया पंजीयन MA403339001 ले लिया गया है, और कस्टम मिलिंग की जा रही है, स्वतंत्र आवाज़ की खबरों को लेकर कलेक्टर ने खाद्य नियंत्रक अमृत कुजूर को जांच के निर्देश दिए, जिसके बाद खाद्य नियंत्रक ने तहसीलदार राजेंद्र भगत, सहायक खाद्य अधिकारी विनीता दास और खाद्य निरीक्षक ललिता शर्मा की जांच टीम नियुक्त किया है..

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अब सवाल उठता है कि, नवंबर माह में नया पंजीयन प्राप्त करने वाले राइस मिल का निरीक्षण करने सहायक खाद्य अधिकारी विनीता दास ने भौतिक सत्यापन कर उसे पास कर दिया था जिसके बाद पिछले वर्ष का चावल जमा करने के बजाएं राइस मिल के संचालक ने दूसरे यूनिट से धान की मिलिंग करना शुरू कर दी.. लेकिन मीडिया में मामला उछलने के बाद जांच के आदेश दिए गए है तो अब सवाल उठता है कि क्या सहायक खाद्य अधिकारी विनीता दास ने भौतिक सत्यापन पर कोई घोर लापरवाही बरती थी? और अगर जबरिया नए पंजीयन के बाद खरीदी शुरू हुई तो मिलर के पास पूर्व वर्ष और इस वर्ष का धान मौके पर मिलेगा..

बिलासपुर में एक ओर जमकर खरीदी की गई तो दूसरी ओर रिसाइकिलिंग रोकने के लिए लगातार कार्रवाई भी की जा रही है, मां नारायणी राइस मिल के संचालक द्वारा पिछले वर्ष का 50 प्रतिशत चावल भी जमा नहीं किया है और आरोप के हिसाब से कोढ़हा मिल को राइस मिल बताकर नया पंजीयन प्राप्त करने वाले अमित मित्तल को धान खरीदने की छूट भी मिल गई है, क्या बिना सरकारी सहयोग की इस तरह शासन की आंखों में धूल झोंककर कोई राइस मिल इस तरह का काम कर सकता है, और क्यों विभाग द्वारा जानकारी के बावजूद भौतिक सत्यापन क्यों नहीं किया जा रहा है.. क्या बिलासपुर में भी कवर्धा की तरह मामला उछलने का इंतजार किया जा रहा है..

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