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एकला चलो की नीति कैसे लगाएगी आप की नैया पार.. बिलासपुर आम आदमी पार्टी में भूचाल से पहले की शांति- कार्यकर्ता..

बिलासपुर– छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव के लिए आम आदमी पार्टी ने आज अपनी दूसरे लिस्ट जारी कर दी है, आज जारी की गई लिस्ट में बिलासपुर कोटा मस्तूरी समेत कुल 12 विधानसभा में उम्मीदवार चयनित किए गए हैं.. कुछ उम्मीदवारों को लेकर जहां एक राय बन गई थी वहीं कोई उम्मीदवारों को लेकर पार्टी में भूचाल आने की आशंका पार्टी के कार्यकर्ता ही जताते नजर आ रहे हैं.. दरअसल बिलासपुर विधानसभा से जिस उम्मीदवार को पार्टी ने टिकट दिया है, उस पर एकला चलो की नीति के साथ काम करने के आरोप भी लग चुके हैं इतना ही नहीं पार्टी द्वारा उन्हें कुछ माह पहले नोटिस भी जारी किया गया था, बिलासपुर आम आदमी पार्टी में दो महिला नेत्रों की लड़ाई जग जाहिर रही है ऐसे में संगठन को छोड़कर एकला चलो की नीति अपनाने वाली उज्ज्वला करने को टिकट देने से पार्टी को कितना फायदा होगा यह तो आने वाला ही समय ही बताएगा..
बिलासपुर आम आदमी पार्टी में संगठन और एकला चलो से पार्टी के कामकाज को करने वाले दोनों को एक दूसरे के घूर विरोधी रहे हैं शहर में लगे बैनर पोस्टर से समझा जा सकता है कि जिला अध्यक्ष और प्रदेश सचिव समेत प्रदेश कोषाध्यक्ष जिनकी पार्टी में खासी पकड़ मानी जाती है उनका चेहरा हमेशा से ही गायब रहा है.. ऐसे में से शीर्ष नेतृत्व द्वारा संगठन को नाराज कर एकला चलो की नीति अपनाने वाली नेता को टिकट देने से पार्टी को कितना फायदा मिलेगा यह बड़ा सवाल है..
पिछले कुछ दिनों में पार्टी में जिस तरह की उठा पटक मची है उसे समझा जा सकता है कि पार्टी में असंतोष व्यापक रूप से फैला हुआ है कुछ दिन पहले ही पार्टी पदाधिकारी को पार्टी विरोधी कार्य के नाम पर निष्कासित किया गया था, लेकिन जिस तरह पूर्व पदाधिकारी द्वारा पार्टी में पैसे लेकर टिकट बांटने का सवाल खड़ा किया गया उससे इनकार नहीं किया जा सकता क्योंकि आरोप के साथ उस नेता ने कई ऑडियो भी वायरल किए थे जो लगातार चर्चा का विषय बना हुआ था..
पार्टी में काम की गंभीरता को लेकर भी लगातार सवाल खड़े होते रहे हैं इससे पहले जिला अध्यक्ष गोपाल यादव ने तय किए गए प्रत्याशी को नोटिस जारी कर जवाब मांगा था तब पार्टी में हड़कंप मच गया था, इसके अलावा पार्टी को छोड़ बाहरी लोगों के हिसाब से काम करने का आरोप भी डॉ. उज्ज्वला करने पर लग चुका है.. पार्टी सूत्रों की माने तो संगठन का एक मजबूत धड़ा उज्वला करने को टिकट मिलने से खासा नाराज नजर आ रहा है और यह नाराजगी पार्टी के लिए कितनी नुकसानदेह होगी यह तो आने वाला वक्त ही बताएगा..
नाम न बताने की शर्त पर पार्टी के एक कर्मठ कार्यकर्ता ने बताया कि, प्रत्याशी के नाम के चयन को लेकर पार्टी के शीर्ष नेतृत्व और जिला संगठन काफी मतभेद था और टिकट फाइनल करने से पहले पार्टी के कार्यकर्ताओं और पता अधिकारियों को भरोसे में नहीं लिया गया है.. ऐसे में सवाल उठता है कि, छत्तीसगढ़ में अपनी राजनीतिक जमीन तरसते वाली आम आदमी पार्टी जो पूरी ताकत से छत्तीसगढ़ में उतरी है आपसी फूट और एकला चलो की नीति अपनाने वालों के साथ कितना आगे बढ़ पाएगी..

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