तिरछी नजर- कर्म का ज्ञान अगर लोमड़ी से लिया जाएं तो मुर्गी चुराना पुण्य माना जाएगा.. सेटिंग और संरक्षण का खेल, जहां होनी थी कार्रवाई वहां मिल गया अतिरिक्त प्रभार, ऊपर वाला सेट हो तो क्या नहीं हो सकता..

बिलासपुर– कहा जाता है बुरे काम का नतीजा हमेशा बुरा ही होता है लेकिन कर्म का ज्ञान अगर लोमड़ी से लिया जाए तो मुर्गी चुराना भी पुण्य माना जाएगा.. इसी वाक्य को चरितार्थ होता देखना है तो बिलासपुर के खाद्य विभाग में पदस्थ निरीक्षक के काम को देखना पड़ेगा, दरअसल बीते महीनों में विभाग के एक निरीक्षक के कामों की चर्चा अधिकारीयों विभागीय कर्मचारियों और जनप्रतिनिधियों के बीच जमकर रही है, क्योंकि ऊपर वालों को प्रॉपर प्लानिंग के साथ सेट करके ही जगजाहिर साक्ष्यों को झुठलाकर या जांच में उन्हें शामिल नहीं करके नियमों को ऐसी तैसी की जा सकती हैं..
कहानी शुरूआत से..
कुछ माह पूर्व एक शिकायतकर्ता सामने आया था जो पूर्व में गनियारी में स्थित शासकीय उचित मूल्य दुकान का संचालन करता था, और उसका नाम भीम सूर्यवंशी था, उन दिनों क्षेत्र के खाद्य निरीक्षक श्याम वस्त्रकार क्षेत्र में अपना वर्चस्व स्थापित करने में पूरी तरह कामयाब हो गए थे इसीलिए तो 40 से अधिक दुकानदारों और ब्लॉक में शासकीय उचित मूल्य दुकान विक्रेता कल्याण संघ के संयुक्त शिकायत के बावजूद भी क्षेत्र के विधायक महोदय कार्रवाई न कर पाने में लाचार थे, क्षेत्र दुकानदारों की परेशानियों और शिकायत के बाद भी विधायक द्वारा कार्रवाई के लिए कोई कदम न उठा पाने की वजह से श्याम वस्त्रकार का सेल्फ कॉन्फिडेंस सातवें आसमान पर था, जिसके बाद उन्होंने गनियारी शासकीय उचित मूल्य दुकान पर कार्रवाई का जोर भी दिखाया लेकिन उससे पहले 20,000 रुपए ऑनलाइन ले भी लिया, लेकिन वाह रे सिस्टम और सेंटिंग का खेल, नगदी लेने का प्रमाण देने वाले दुकानदार पर कार्रवाई हो गई और उसके द्वारा साक्ष्य प्रस्तुत करने वाला दुकानदार भटक रहा है,
गनियारी के पूर्व शासकीय उचित मूल्य दुकान के संचालक भीम सूर्यवंशी ने खाद्य निरीक्षक की शिकायत करनी शुरू की, तत्कालीन खाद्य नियंत्रक अनुराग भदौरिया के खास (बहुत खास) की शिकायत के बावजूद भी खाद्य नियंत्रक ने शिकायत को दरकिनार कर दिया, जिसके बाद तत्कालीन कलेक्टर को शिकायत की गई, लेकिन कागजों का खेल विभाग से दूसरे विभाग में चलता रहा, भीम ने न्याय नहीं मिलने पर खाद्य मंत्री मुख्यमंत्री समेत कई जगह शिकायत की लेकिन जांच के लिए कागज खाद्य विभाग और तखतपुर एसडीएम कार्यालय तक पहुंच कर दम तोड़ दे रही थी इसी दौरान शिकायतकर्ता भीम सूर्यवंशी ने मीडिया के सामने श्याम वस्त्रकार के कारनामों का साक्ष्य प्रस्तुत किया जिसके बाद प्रशासन और कागज दबाएं बैठे अधिकारियों की किरकिरी शुरू हुई, और जांच का दौर शुरू हुआ, जांच के दौरान शिकायतकर्ता का बयान भी लिया गया लेकिन सारे साक्ष्य होने के बावजूद भी जांच रिपोर्ट खाद्य निरीक्षक के पक्ष में बनी, अब दूसरी ओर शिकायतकर्ता जांच रिपोर्ट के लिए भटक रहा है, उसे एसडीएम कार्यालय और कलेक्ट्रेट में बार बार रिपोर्ट के लिए हाजिरी भी लगानी पड़ रही है..
दुकान का प्रभार सौंपने में घपलेबाजी..
तखतपुर के गनियारी शासकीय उचित मूल्य दुकान के संचालक भीम सूर्यवंशी को हटाकर दुकान को बगल के भुंडा ग्राम पंचायत में संचालित शासकीय उचित मूल्य दुकान में अटैच कर दिया गया है और दूर से एक विक्रेता लाकर बैठा दिया गया.. मजेदार बात यह थी कि, न तो विक्रेता समिति को जानता था और न ही समिति को दुकान के संचालन के विषय में कुछ जानकारी थी, प्रभार सौंपने के नियमों को दरकिनार कर निरीक्षक श्याम वस्त्रकार ने अपने विश्वसनीय को विक्रेता बनाकर बैठा दिया.. पूर्व में भुंडा ग्राम पंचायत में स्थित शासकीय उचित मूल्य दुकान का संचालन करने वाली समिति जय मां संतोषी में अटैच किया गया उसके संचालक राजू पात्रे ने फोन पर जानकारी देते हुए बताया था कि, पिछले वर्ष जब गनियारी शासकीय उचित मूल्य दुकान के पूर्व संचालक भीम सूर्यवंशी पर कार्रवाई की गई थी तब दुकान को निलंबित कर उसे जय मां संतोषी समिति में अटैच किया गया था, लेकिन इसकी जानकारी श्याम वस्त्रकार द्वारा नहीं दी गई थी, कुछ महीने बाद भीम ने ही भुंडा संचालक राजू पात्रे को जानकारी दी कि, गनियारी का दुकान भुंडा में अटैच किया गया है लेकिन विक्रेता समिति का नहीं है और किसी और जगह से बुलाया गया है.. जिसके बाद राजू पात्रे ने खाद्य निरीक्षक श्याम वस्त्रकार से इस संबंध में पूछा भी कि, दुकान अटैच करने की जानकारी उन्हें क्यो नहीं दी गई, और ऐसे आदमी को विक्रेता क्यों बनाया गया जिसे समिति जानता ही नहीं, लेकिन श्याम वस्त्रकार ने पद का प्रभाव दिखाते हुए उन्हें कुछ भी बताने से मना कर दिया, आगे देखते है कि, बात कर राजू पात्रे को घुमा दिया गया..
मेहरबानी का खेल..
तखतपुर में जमकर किरकिरी होने के बाद तत्कालीन खाद्य नियंत्रक अनुराग सिंह भदौरिया ने अपने चहेते निरीक्षक श्याम वस्त्रकार को बचाने के लिए तखतपुर से हटाकर मस्तूरी में पदस्थ कर दिया, जिसके बाद जांच की रिपोर्ट भी एसडीएम ने उनके पक्ष में बना दी, जांच में कितनी ईमानदारी बरती गई है यह बड़ा सवाल है? क्योंकि भीम सूर्यवंशी ने बिलासपुर कलेक्टर से मांग भी की थी कि, किसी अन्य अधिकारी से मामले की जांच कराई जाएं, क्योंकि खाद्य निरीक्षक और एसडीएम पर उन्होंने कंटेंट ऑफ कोर्ट लगाया था, लेकिन ऐसा नहीं हुआ.. दूसरी तरफ खाद्य नियंत्रक की मेहरबानी श्याम वस्त्रकार के लिए और भी बढ़ गई, उन पर लगे गंभीर आरोप और ऑनलाइन रिश्वत लेने के साक्ष्य के बावजूद भी इनाम के रूप में मस्तूरी ब्लॉक के साथ उत्तर बिल्हा का ब्लॉक भी दे दिया, देने के पीछे कुछ कारण तो जरूर होगा?..
वर्तमान परिस्थितियों को देखा जाएं और तो पिछले कुछ दिनों में बिलासपुर में कई लोगों पर लगातार मामले दर्ज किए गए शिकायत के आधार पर, लेकिन दूसरी ओर एक सरकारी अधिकारी खुलेआम फंसाने के नाम पर ऑनलाइन के माध्यम से नगदी लेता है जिसका साक्ष्य भी मौजूद है, नियमों को ताक पर रखकर दुकान अटैच करता है राशन की चोरी करने वाले विक्रेता को पनाह देता है उसे विभागीय अधिकारी इनाम के रूप में अतिरिक्त प्रभार देते है.. ऐसे में सवाल उठता है कि, ऐसे अधिकारी जिसके खिलाफ सारे साक्ष्य है उन्हें ऊपर वालों का संरक्षण और सेटिंग के दम पर कुछ भी किया जा सकता है..
अगले अंक में- रिश्तेदार विक्रेता को बैठाकर, समिति को किया दरकिनार, श्याम के खिलाफ शिकायतों की लंबी फहरिस्त..
साथियों ‘तिरछी नजर’ स्वतंत्र आवाज़ विशेष अंक के साथ प्रकाशित किया जाएगा, जो जनता के हक और उनसे जुड़े मुद्दों पर केंद्रीत होगा.. ताकि जानकारी और समाचार जिम्मेदारों तक पहुंच सकें..



