बिलासपुर

बिलासपुर में भाजपा पार्षद ने अपने ही सरकार पर साधा निशान.. कचरे के कचरा प्रबंधन को लेकर निगम सरकार को घेरा.. निगम के कर्मचारियों ने लगाई आग, धुएं से स्थानीय लोगों का जीना दुसवार..

कचरे को एकत्रित कर उसमें आग लगाकर कर्मचारी भाग गए, जिसकी वजह से स्थानीय लोगों बुजुर्गो बच्चो और बीमार लोगों को जहरीली गैस में सांस लेने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है..

बिलासपुर– छत्तीसगढ़ के दूसरे सबसे बड़े शहर बिलासपुर में नगर निगम के पार्षद द्वारा अपनी सरकार के ख़िलाफ़ जमकर निशाना साधा है और नगर निगम के अधिकारियों और महापौर के खिलाफ बयान दिया है दरअसल बीते दिनों नगर निगम की सामान्य सभा के दौरान नगर निगम वॉर्ड क्रमांक 13 मंगला के पार्षद रमेश पटेल द्वारा वॉर्ड के छपराभाटा में कचरा डंपिंग को लेकर सवाल खड़ा किया था, लेकिन नगर निगम की सामान्य सभा में जवाब तलब के बाद आगे कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई, लेकिन आज देर शाम नगर निगम के कर्मचारियों द्वारा वहां डंप किए गए कचरे में आग लगाई गई जिससे कचरे में मौजूद प्लास्टिक पन्नी और ज़हरीली गैस वाले कचरे जलने लगे और आस पास के रिहायशी इलाकों में रहने वाले लोगों का जीना दुसवार हो गया..

इस लापरवाही और जनता को होने वाली परेशानियों को लेकर वॉर्ड के लोगों और वॉर्ड पार्षद रमेश पटेल के भीतर निगम सरकार और अधिकारियों के प्रति जमकर रोष देखने को मिला.. जनता के हित के लिए वॉर्ड पार्षद रमेश पटेल ने अपनी ही सरकार के खिलाफ बगावत का बिगुल फूंक दिया और कैमरे के सामने जमकर खरी खोटी सुनाई.. इतना ही नहीं उन्होंने अधिकारियों और महापौर पर गैरजिम्मेदारी का आरोप भी लगा दिया, उन्होंने कहा कि, कछार में कचरा डंप करने की व्यवस्था बनाई गई है लेकिन निगम के कर्मचारियों द्वारा मंगला में कचरा डंप किया जाता है जिसकी वजह से बरसात के दिनों में गंदे पानी और बदबू का सामना लोगो को करना पड़ता है, वहीं सूखे दिनों में कचरे को एकत्रित कर उसमें आग लगाकर कर्मचारी भाग गए, जिसकी वजह से स्थानीय लोगों बुजुर्गो बच्चो और बीमार लोगों को जहरीली गैस में सांस लेने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है..

बिलासपुर नगर निगम को स्वच्छता और सुंदरता को लेकर कुछ माह पहले राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान मिला है जिसे ग्रहण करने महापौर पूजा विधानी खुद दिल्ली गई हुई थी लेकिन बिलासपुर में स्वच्छता और सुंदरता की असलियत देखनी हो तो धरातल में निगम क्षेत्र में घूम लेने मात्र से सच्चाई सामने आ जाती है, पेयजल व्यवस्था के लिए लोगों को संघर्ष करना पड़ रहा है, सड़को के लिए व्यापारियों को प्रदर्शन करना पड़ रहा है, सफाई के लिए मशक्कत करनी पड़ती है, इतना ही नहीं अब तो सत्ता में आसीन पार्टी के पार्षद खुद ही निगम सरकार के खिलाफ बगावत का बिगुल फूंक रहे हैं ऐसे में बिलासपुर नगर निगम में विकास और स्मार्ट सिटी की क्या स्थिति है अंदाजा लगाया जा सकता है, ट्रिपल इंजन की सरकार के दावे, बिलासपुर को दो नगर निगम बनाने के दावे और राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान मिलना कैसे सम्भव हुआ है यह सोचने वाली बात है..

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