छत्तीसगढ़

महर्षि यूनिवर्सिटी में वर्षों से चली आ रही अनियमितताओं के खिलाफ एनएसयूआई का संघर्ष जारी, निरीक्षण समिति को सौंपा गया ज्ञापन..

बिलासपुर–  छत्तीसगढ़ में छात्रहित की आवाज़ बनकर वर्षों से संघर्ष कर रहे एनएसयूआई छात्र संगठन ने एक बार फिर महर्षि विश्वविद्यालय, बिलासपुर में व्याप्त गंभीर शैक्षणिक, प्रशासनिक एवं वित्तीय अनियमितताओं को लेकर सशक्त हस्तक्षेप किया..

आज महर्षि विश्वविद्यालय परिसर में छत्तीसगढ़ निजी विश्वविद्यालय विनियामक आयोग (CGPURC) की निरीक्षण समिति के आगमन के दौरान एनएसयूआई जिलाध्यक्ष रंजीत सिंह के नेतृत्व में विस्तृत ज्ञापन निरीक्षण समिति के अध्यक्ष डॉ. एम.एस.के. खोखर, सेवानिवृत्त प्राध्यापक गुरू घासिदास विश्वविद्यालय बिलासपुर, सदस्य प्रो. संतोष कुमार गुप्ता, सदस्य (प्रशासनिक), छत्तीसगढ़ निजी विश्वविद्यालय विनियामक आयोग एवं सदस्य डॉ. बी.एल. गोयल, सेवानिवृत्त अतिरिक्त संचालक, बिलासपुर को सौंपा गया, जिसमें विश्वविद्यालय प्रबंधन द्वारा वर्षों से की जा रही अनियमितताओं को प्रमुखता से रखा गया..

जिलाध्यक्ष रंजीत सिंह ने बताया कि, ज्ञापन में विशेष रूप से यह उल्लेख किया गया है कि—

विश्वविद्यालय में डीएलएड पाठ्यक्रमों के संचालन में नियमों की अनदेखी की जा रही है साथ ही एक ही व्यक्ति द्वारा महर्षि यूनिवर्सिटी तथा महर्षि शिक्षा संस्थान (शिक्षा विभाग) के डीएलएड के छात्रों के अंकसूची में प्राचार्य के सील मुहर के साथ हस्ताक्षर कर विद्यार्थियों को वितरित किया गया है। जो कि सीधे तौर पर छात्रों के भविष्य के साथ लगातार खिलवाड़ है..

डीएलएड एवं अनेकों अन्य पाठ्यक्रम बिना विधिवत शुल्क निर्धारण एवं मानकों के संचालित किए जा रहे हैं..

कुलसचिव की नियुक्तियों, शैक्षणिक योग्यता, अनुभव एवं प्रशासनिक प्रक्रियाओं में पारदर्शिता का अभाव है।

छत्तीसगढ़ निजी विश्वविद्यालय विनियामक आयोग द्वारा छत्तीसगढ़ शासन को दिए गए अभिमत के अनुसार महर्षि विश्वविद्यालय / महर्षि शिक्षा संस्थान को निजी विश्वविद्यालय (स्थापना एवं संचालन) अधिनियम 2005 की धारा 41(1) में निहित प्रावधानुसार बंद करने की अनुशंसा लागू हो।

महर्षि यूनिवर्सिटी तथा महर्षि शिक्षा संस्थान (शिक्षा विभाग) में भारी अनियमितता और जांच में सहयोग नहीं करने के कारण छात्रवृत्ति पर रोक..

महर्षि यूनिवर्सिटी द्वारा सेंटर के माध्यम से किया जाने वाला वित्तीय अनियमितता।

यूजीसी द्वारा महर्षि विश्ववि‌द्यालय को डिफॉल्टर घोषित किया गया।

नकल प्रकरण (खुलेआम नकल कराना) जो आज भी निरंतर चालू है।

पीएचडी पाठ्यक्रम में भारी फर्जीवाड़ा और अनियमितता।

एक ही भूमि भवन में दो संस्थाएं संचालित 1. महर्षि यूनिवर्सिटी तथा 2. महर्षि शिक्षा संस्थान (शिक्षा विभाग)

फर्जी प्राध्यापकों की सूची सीजीपीयूआरसी को देकर विश्वविद्यालय संचालित करना..

इस प्रकार से एनएसयूआई ने कुल 14 बिंदुओं में 10 पृष्ठ का ज्ञापन निरीक्षण समिति को सौंपा है।
एनएसयूआई जिलाध्यक्ष ने यह भी स्पष्ट किया कि पिछले कई वर्षों से छात्रहित में लगातार शिकायतें, ज्ञापन और आवेदन प्रशासनिक एवं नियामक संस्थाओं को दिए जाते रहे हैं, किंतु अब तक ठोस एवं निर्णायक कार्यवाही नहीं हो पाई है। निरीक्षण के दौरान परिसर में पुलिस बल की तैनाती भी की गई थी, जिससे पूरे घटनाक्रम की संवेदनशीलता स्पष्ट होती है..

निरीक्षण समिति के अध्यक्ष एवं सदस्यों ने एनएसयूआई प्रतिनिधिमंडल को आश्वस्त किया कि ज्ञापन में उठाए गए सभी बिंदुओं पर गंभीरता से संज्ञान लेते हुए नियमानुसार उचित एवं निष्पक्ष कार्यवाही की जाएगी.. एनएसयूआई जिलाध्यक्ष रंजीत सिंह ने कहा कि “एनएसयूआई छात्र संगठन पिछले कई वर्षों से छात्रहित की लड़ाई पूरी मजबूती के साथ लड़ता आ रहा है। महर्षि विश्वविद्यालय में हो रही अनियमितताएं केवल नियमों का उल्लंघन नहीं हैं, बल्कि यह छात्रों के भविष्य के साथ खुला अन्याय है। जब तक दोषियों पर ठोस कार्यवाही नहीं होती, एनएसयूआई का संघर्ष जारी रहेगा और बहुत ही जल्द सभी प्रमाणित दस्तावेजों के साथ बिलासपुर कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर जांच और कार्यवाही की मांग की जाएगी, हम किसी भी कीमत पर छात्रों के अधिकारों से समझौता नहीं करेंगे..”

इस दौरान एनएसयूआई के पदाधिकारी, कार्यकर्ता एवं छात्र साथी भारी संख्या में उपस्थित रहे, जिन्होंने एकजुट होकर छात्रहित की आवाज़ बुलंद की, एनएसयूआई ने स्पष्ट किया है कि यदि शीघ्र ही ठोस निर्णयात्मक कार्यवाही नहीं की जाती, तो संगठन आगे और भी व्यापक आंदोलन के लिए बाध्य होगा..

कार्यक्रम में मुख्य रूप से एनएसयूआई जिलाध्यक्ष रंजीत सिंह, प्रदेश सचिव लोकेश नायक, युवा कांग्रेस महासचिव बिट्टू साहू, महासचिव चंद्रप्रकाश साहू,उमेश पटेल, प्रवीण साहू, सुरेन्द्र साहू, जशवंत वर्मा,।संजय पटेल, रमेश पटेल, किशन नायक, दिलीप, कमलेश, कामेश, कमलेश सिदार, प्रभात, जितेंद्र साहू, विप्लव यादव, रवि चंद्राकर, सूरज चंद्रवंशी, डेकेश चंद्रा, पुष्कर पाल आदि बड़ी संख्या में एनएसयूआई के पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता उपस्थित रहे..

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