हाईकोर्ट के आदेशों की उड़ाई धज्जियां.. एसआई के लिए नियम बेअसर, पुलिस की भूमिका पर सवाल..
ध्वनि प्रदूषण और डीजे पर नियंत्रण को लेकर छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के स्पष्ट निर्देश हैं कि निर्धारित समय सीमा और ध्वनि स्तर का सख्ती से पालन कराया जाए, खासकर परीक्षा के दौरान..

बिलासपुर– ध्वनि प्रदूषण और डीजे पर नियंत्रण को लेकर छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के स्पष्ट निर्देश हैं कि निर्धारित समय सीमा और ध्वनि स्तर का सख्ती से पालन कराया जाए, खासकर परीक्षा के दौरान.. इसके बावजूद सिरगिट्टी थाना क्षेत्र में इन आदेशों की खुलेआम अनदेखी का मामला सामने आया है, जहां थाना प्रभारी की गैरहाजिरी में प्रभारी की भूमिका निभा रहे.. सब-इंस्पेक्टर हेतराम वर्मा के रहते हुए तेज आवाज में डीजे बजता रहा और सड़क तक बाधित कर दी गई.. यह घटना उस समय हुई जब जिले में 10वीं और 12वीं बोर्ड परीक्षाएं चल रही हैं और प्रशासन स्वयं ध्वनि नियंत्रण को लेकर गंभीरता दिखाने की बात करता है, लेकिन शादी समारोह के दौरान देर रात तक तेज आवाज में डीजे और साउंड सिस्टम बजता रहा, जिससे आसपास के रहवासियों और परीक्षार्थियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा, हैरानी की बात यह रही कि आम नागरिकों को हाई कोर्ट के आदेशों का हवाला देकर कार्रवाई करने वाली पुलिस इस मामले में पूरी तरह निष्क्रिय नजर आई..
स्थानीय लोगों का कहना है कि पुलिस आम मामलों में नियमों का हवाला देकर सख्ती दिखाती है, लेकिन जब मामला खुद थाने से जुड़े प्रभावशाली अधिकारी के परिवार का हो, तो वही नियम लागू नहीं होते..
थाना प्रभारी की अनुपस्थिति में प्रभारी की जिम्मेदारी संभाल रहे सब-इंस्पेक्टर हेतराम वर्मा पर कानून का पालन सुनिश्चित कराने की जिम्मेदारी थी, लेकिन इस मामले में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया, जिससे पुलिस की निष्पक्षता और कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं, इस घटना ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या हाई कोर्ट के आदेश केवल आम जनता के लिए ही हैं, और क्या वर्दी और पद के प्रभाव के सामने कानून कमजोर पड़ जाता है, अब देखना होगा बड़े अधिकारी इस मामले को कितनी गंभीरता से लेते हैं..



