बिलासपुर– जिले में प्रशासन द्वारा छत्तीसगढ़ राज्य के स्थापना के 25 वर्ष पूर्ण होने पर रजत जयंती चावल उत्सव मना रहा है जिसके तहत हितग्राहियों को 3 माह का चावल एकमुश्त दिया जा रहा है, लेकिन जनता की थाली में जाने वाला चावल गोल चकरी के सहारे राइस मिल में वापस जा रहा है और शासन की महत्वाकांक्षी योजना की धज्जियां उड़ाने का काम किया जा रहा है.. बिलासपुर शहर से 10 किलोमीटर दूर पंधी ग्राम पंचायत में स्थित एसडी राइस मिल में पीडीएस का चावल बड़ी मात्रा में खपाया रहा है, जानकारी के अनुसार शहर से पिकअप और बड़ी गाड़ियों में भरकर पीडीएस चावल को ठिकाने लगाने का काम राइस मिलर द्वारा किया जा रहा है..

धान खरीदी के बाद धान को कस्टम मिलिंग के लिए राइस मिलो में भेजा जाता है, जहां मिलिंग के बाद राइस मिलर चावल को वापस शासन को सौंपते है जिसके बाद गोदामों से शासकीय उचित मूल्य दुकान तक चावल पहुंचकर जनता को मिलता है.. छत्तीसगढ़ राज्य में गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन करने वाले लोगों के भरण पोषण के लिए राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम योजना के अंतर्गत मुफ्त में चावल और सस्ती कीमतों पर अन्य खाद्य साम्रगी उपलब्ध कराने का काम किया जा रहा है.. लेकिन बिलासपुर जिले में इसका अलग ही रूप देखने को मिल रहा है..

शहर के अलग अलग दुकानों से चावल की अफरा तफरी कर उसे एकत्रित कर दलाल के माध्यम से राइस मिल में भेजने का काम हो रहा है, पूरे सिंडिकेट से चलने वाला यह सिस्टम किसी गोल चकरी के समान है, क्योंकि जो चावल राइस मिल से निकलकर गोदाम फिर शासकीय उचित मूल्य दुकान से जनता तक पहुंचता है और इस पूरी योजना के लिए शासन को कई सौ करोड़ लगाने पड़ते है, लेकिन हजारों करोड़ की योजना को सिंडिकेट लगाकर फेल करने में कोई कसर नहीं छोड़ा जा रहा है.. बड़ा सवाल है कि, जनता की थाली में जाने वाले चावल को सही जगह पर पहुंचाने की सरकार की मंशा पर पानी फेरने वालों के खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं की जा रही है.. और अगर इस खबर से जिम्मेदारों की आंख खुलती है तो राइस मिल और मिलर से पूछा जाना चाहिए कि आखिर जनता की थाली में पहुंचने वाले चावल को राइस मिल में वापस भेजने का क्या मतलब है..?