बिलासपुर– जिले में प्रशासन द्वारा छत्तीसगढ़ राज्य गठन के 25 वर्ष पूर्ण होने पर रजत जयंती चावल उत्सव मनाया गया, लेकिन इस उत्सव का उत्साह और मौज जनता की जगह पीडीएस चावल के दलाली करने वाले दुकानदार, जरनल स्टोर से लेकर राइस मिलर उठाते रहे, लगातार न्यूज चैनल, अखबार, और सोशल मीडिया के माध्यम से सूचनाएं खबरें और जानकारी प्रशासनिक अधिकारी और निरीक्षकों तक पहुंचती रहीं लेकिन किसी के कान में जूं तक नहीं रेंगी.. इससे सवाल उठता है कि, प्रशासनिक अधिकारी जनता और प्रशासन के प्रति जवाबदेह हैं या हेराफेरी करने वालों के हितैषी?..

न्यायधानी बिलासपुर समेत पूरे जिले में राज्य के स्थापना के 25 वर्ष पूर्ण होने पर रजत जयंती चावल उत्सव मानने का निर्णय प्रशासन द्वारा लिया गया, जिसके तहत गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन करने वाले हितग्राहियों का पेट भरने के लिए 3 माह (अप्रैल, मई, जून) का चावल एकमुश्त देने का निर्णय लिया गया, इसके लिए युद्ध स्तर पर तैयारियां भी की गई.. जनता को एकमुश्त चावल देने के लिए गोदामों से बड़ी मात्रा में पीडीएस चावल दुकानों में पहुंचाया गया, एक साथ तीन माह का अंगूठा लेने की व्यवस्था बनाई गई.. बकायदा दुकानों में बैनर पोस्टर लगाएं गए, पहले दूसरे दिन दुकान पहुंचने वाले हितग्राहियों की फोटो लेकर दिखाया गया, लेकिन दूसरी ओर सच्चाई सोशल मीडिया न्यूज और अन्य माध्यमों से सामने आती रही..

जिले में शासकीय उचित मूल्य दुकान के माध्यम में लाखों परिवारों को मुफ्त में एकमुश्त चावल दिया जा रहा है, मुफ्त का चावल दुकानदार और चावल दलालों की मदद से राइस मिल वापस जा रहा है, शहर से दूर पंधी, सिरगिट्टी और बिल्हा में स्थित कई राइस मिलो में जनता का चावल डंप हो रहा है, बड़ा सवाल यह उठता है कि कस्टम मिलिंग के बाद राइस मिल से शासन को भेजा गया चावल घूम कर वापस राइस मिल में कैसे पहुंचा, और राइस मिलर को क्या जरूरत पड़ गई की वह चावल दलालों के माध्यम से वापस मंगा रहा है, वो भी 24 से 25 रुपए देकर.. सीपत रोड में स्थित राइस मिलर बलबीर सिंह की एसडी राइस मिल में पीडीएस का चावल को ले जाते वीडियो और तस्वीरें भी सामने आ चुकी है.. इसके बावजूद भी कोई कार्रवाई नहीं की गई, इतना ही नहीं संबंधित खाद्य विभाग के अधिकारी और निरीक्षक ने इस मामले में संज्ञान लेना तक जरूरी नहीं समझा..

राइस मिल तक जनता को दिए जाने वाले चावल और सरकार की महत्वाकांक्षी योजना पर पलीता लगाने वाले शुरुआती लोग ही दुकानदार होते है, जनता के चावल को गबन कर खरीद फरोख्त कर दलाल को 23 से 24 रुपए के हिसाब से पीडीएस चावल को बेच दिया जाता है, जिसके बाद दलाल कई जगहों से चावल एकत्रित कर बड़ी मात्रा में चावल को अलग अलग राइस मिलो में रेट के हिसाब से भेज दिया जाता है.. शासकीय उचित मूल्य दुकानो के दुकानदारों की चावल तस्करी का वीडियो फोटो आएं दिन सामने आते रहते है लेकिन विभागीय अधिकारी अंगद के पैर की तरह कार्रवाई न करने की कसम खाएं हुए है.. चावल उत्सव में शुरूआत के साथ ही विक्रेताओं की अफरा तफरी शुरू हो गई थी, दुकानों को बंद कर चावल की अफरा तफरी करते कैमरे में रिकॉर्ड तक हुए, जिले के शीर्ष अधिकारियों के निर्देश के बाद भी खाद्य विभाग के निरीक्षक गहरी नींद में सोते रहे, सरकंडा, तिलक नगर, मोपका तालापारा, राजकिशोर नगर, हेमू नगर, तिफरा, सिरगिट्टी, दयालबंद, जूना बिलासपुर जैसे इलाको में स्थित शासकीय उचित मूल्य दुकानो में विक्रेताओं द्वारा जमकर हेराफेरी की गई, पीडीएस चावल की अफरा तफरी की जाती है लेकिन विभागीय अधिकारी जानकर भी अंजान बनने की कला में माहिर गए है..

शासन की महत्वाकांक्षी योजना के प्रति खाद्य विभाग में पदस्थ अधिकारियों को जितनी जवाबदेह होना चाहिए वो उतने नजर नहीं आते है.. बिलासपुर के पूर्व और तत्कालीन कलेक्टर अवनीश शरण ने चावल वितरण में अफरा तफरी करने खरीद फरोख्त करने वालों के खिलाफ एफआईआर का आदेश दिया था, जिसके बाद कई मामले सामने आने के बाद कार्रवाई भी हुई थी, लेकिन अब खाद्य विभाग के अधिकारी और निरीक्षक कार्रवाई तो दूर की बाद जानकारी और मामला सामने आने के बाद जांच तक में जाना जरूरी नहीं समझते इसलिए तो छत्तीसगढ़ सरकार अरबों खरबों रुपए लगाकर गरीब का पेट भरने के लिए चावल उपलब्ध करा रही है और विभागीय उदासीनता की वजह से उसी चावल की अफरा तफरी खुलेआम जारी है..