बिलासपुर– छत्तीसगढ़ राज्य में गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन करने वाले लोगों को पोषण की व्यवस्था के लिए राज्य सरकार द्वारा खाद्य सुरक्षा अधिनियम के अंतर्गत सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत हितग्राहियों को मुफ्त में चावल और सस्ती कीमतों पर अन्य खाद्य सामग्री उपलब्ध कराने का कार्य शासकीय उचित मूल्य दुकानो के जरिए किया जा रहा है.. मुफ्त के चावल की कीमत को राज्य और केंद्र सरकार अलग अलग नीतियों के तहत वहन किया जाता है, लेकिन गरीबों के पोषण के लिए दिए जाने वाले पीडीएस चावल की अफरा तफरी के लिए न्यायधानी बिलासपुर में पूरा सिंडिकेट तैयार बैठा हुआ है.. जो दुकानों से लेकर बाजार में गल्लो में बैठे दलालों और सरकार को चावल देकर वापस मिल में चावल लेने वाले राइस मिलरो तक की मिली जुली टीम मैदान में काम कर रही है, दूसरी ओर सरकार द्वारा भी योजना के स्वस्थ परिचालन हेतु खाद्य विभाग के विभाग के माध्यम से निरीक्षक और अधिकारी को जिम्मेदारी दी गई है लेकिन सिंडिकेट वाले सरकारी वालो से कहीं ज्यादा एक्टिव और एक्यूरेट दिखाई पड़ते है..

हालही में शासन द्वारा रजत जयंती चावल उत्सव पर 3 माह का चावल एकमुश्त हितग्राहियों को प्रदान किया गया, लेकिन वो चावल गरीबों के चूल्हे पर पक पाता, इससे पहले सिंडिकेट की लालच की भूख ने गरीबों की भूख को ही निगल लिया, रजत जयंती चावल उत्सव पर जमकर लुट खसोट मचाई गई लेकिन खाद्य विभाग हस्तिनापुर की सभा में धृतराष्ट्र की तरह बैठा रहा.. मीडिया ने महाभारत के संजय की तरह जिले में चल रहे लुट खसोट की जानकारी दी लेकिन धृतराष्ट्र कर भी क्या सकता था..

दुकानों से ऑटो गाड़ियों और जनरल स्टोर तक चावल की अफरा तफरी तक तो ठीक है लेकिन जिले में पूरे गाड़ी में भरे चावल की अफरा तफरी कर दी जा रही है इस पूरे खेल में जिले के कई शासकीय उचित मूल्य दुकान के संचालको (विक्रेताओ) की भूमिका संदिग्ध बताई जा रही है.. विश्वस्त सूत्रों की माने तो ये खेल चावल गोदाम से दुकान के लिए गाड़ी निकलने से पहले शुरू हो जाता है, जहां दुकानदार थोक के भाव में चावल का पैसा ले लेता है, लेकिन शासन को दिखाने और जीपीएस में सबूत बनाने के लिए दुकानों तक गाड़ियों को दौड़ाया जाता है इतना ही नहीं चावल की कुछ बोरियों को उतारा भी जाता है, शहर के तालापारा, मगरपारा, कुम्हारपारा, समता कॉलोनी, गोड़पारा, सरकंडा खपरगंज गांधी चौक, करबला समेत कई इलाकों में इस तरह का काम किया जा रहा है..

बिलासपुर में पीडीएस चावल के सिंडिकेट का सबसे बड़ा खिलाड़ी अपने खेल को शहर के अलग अलग इलाकों में डिवाइड कर खेल को खेलता है, जिसमें सरकंडा क्षेत्र में रिश्तेदार की दुकान, शहर के मध्य नगर में और बाजार इलाका शामिल है.. ये खिलाड़ी सीधा दुकानदारों से सेटिंग करता है और व्यापारी तक समान पलटी कर देता है, राइस मिल तक चावल पलटाने का जोखिम खुद पर नहीं लेता है..

कुछ माह पहले इस तरह का मामला तालापारा के कुम्हारपारा क्षेत्र का था जहां दुकानदार द्वारा दुकान में रखा सारा चावल बेच दिया गया था, लेकिन जानकारी के बावजूद भी खाद्य विभाग के नियंत्रक अमृत कुजूर द्वारा दुकान के भौतिक सत्यापन के लिए निरीक्षक को दुकान में नहीं भेजा गया था, और दुकानदार को वापस बाजार से खरीदकर चावल दुकान में रखने का समय दे दिया गया था.. तीन माह के एकमुश्त चावल वितरण किया जा चुका है, जिसमें जमकर बंदरबांट हुआ लेकिन विभाग अभी भी आंखमूंद कर बैठा हुआ है..

आगे आने वाले अंक में हम जिले में चावल सिंडिकेट के सबसे बड़े खिलाड़ी का नाम उसकी सेंटिंग और दुकान से सामने जीपीएस को चकमा देती गाड़ियों की फोटो वीडियो सामने लाएंगे.. जल्द ही जिले में शासन की महत्वाकांक्षी योजना के साथ खिलवाड़ करने वाले लोगों का पर्दाफाश किया जाएगा..