बिलासपुर– अग्रज नाट्य दल द्वारा आयोजित 45 दिवसीय अभिनय एवं रंगमंच प्रशिक्षण कार्यशाला के अंतर्गत प्रतिभागियों को स्वर अभ्यास एवं नाट्य संगीत का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। कार्यशाला में प्रतिदिन कलाकारों को मंचीय अभिनय की बारीकियों के साथ आवाज, संवाद और संगीत के विभिन्न आयामों से परिचित कराया जा रहा है.. इस क्रम में चंपा भट्टाचार्य द्वारा प्रतिभागियों को स्वर अभ्यास करवाया जा रहा है। उन्होंने कलाकारों को बताया कि रंगमंच में स्वर का विशेष महत्व होता है, क्योंकि कलाकार की आवाज ही उसकी अभिव्यक्ति का सबसे प्रभावी माध्यम होती है। स्पष्ट उच्चारण, सही लय, आवाज का उतार-चढ़ाव और संवादों की प्रभावशाली प्रस्तुति किसी भी नाटक को जीवंत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है..

उन्होंने कहा कि नियमित स्वर अभ्यास से कलाकारों की आवाज में मजबूती, स्पष्टता और आत्मविश्वास आता है। इसके माध्यम से कलाकार मंच पर अपने भावों को अधिक प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत कर पाते हैं। इसी उद्देश्य से आगामी 45 दिनों तक प्रतिदिन स्वर अभ्यास कराया जा रहा है, ताकि प्रतिभागियों की वाणी, संवाद शैली और मंचीय प्रस्तुति में निरंतर निखार आ सके.. वहीं मोहम्मद रफीक द्वारा प्रतिभागियों को नाट्य संगीत का प्रशिक्षण दिया जा रहा है..

प्रशिक्षण के दौरान कलाकारों को नाटकों में संगीत के प्रयोग, ताल-लय की समझ, मंचीय गीतों की प्रस्तुति तथा भावों के अनुरूप गायन की विधियों से अवगत कराया जा रहा है। साथ ही विभिन्न गीतों का अभ्यास भी करवाया जा रहा है, जिससे प्रतिभागी अभिनय के साथ-साथ संगीत के क्षेत्र में भी दक्ष बन सकें.. कार्यशाला का उद्देश्य युवा कलाकारों के व्यक्तित्व, अभिनय क्षमता, स्वर अभिव्यक्ति और मंचीय कौशल का समग्र विकास करना है, ताकि वे भविष्य में बेहतर रंगकर्मी के रूप में अपनी पहचान स्थापित कर सकें..
