बिलासपुर- छत्तीसगढ़ वन कर्मचारी संघ, रायपुर संभाग-बिलासपुर ने कर्मचारियों की लंबित समस्याओं और मांगों के निराकरण नहीं होने पर चरणबद्ध आंदोलन करने का ऐलान किया है, संघ ने इस संबंध में मुख्य वन संरक्षक, बिलासपुर वृत्त बिलासपुर को पत्र सौंपते हुए आंदोलन की रूपरेखा जारी की है..
संघ द्वारा जारी पत्र में कहा गया है कि कर्मचारियों की विभिन्न समस्याओं और मांगों को लेकर पूर्व में 5 मई 2026 को भी विभाग को पत्र भेजा गया था। इसके बावजूद अब तक मांगों पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई और न ही समस्याओं का समाधान हुआ, इससे कर्मचारियों में नाराजगी बढ़ती जा रही है..
वन कर्मचारी संघ ने आरोप लगाया है कि लंबे समय से विभागीय स्तर पर कर्मचारियों की समस्याओं की अनदेखी की जा रही है। कई बार मांगों को शासन और अधिकारियों के समक्ष रखने के बावजूद सकारात्मक पहल नहीं हुई, जिसके चलते अब आंदोलन का रास्ता अपनाने का निर्णय लिया गया है..
चार चरणों में होगा आंदोलन
संघ ने आंदोलन को चार चरणों में संचालित करने की घोषणा की है..
पहला चरण – काली पट्टी बांधकर विरोध
संघ के अनुसार 13 मई 2026 को वन कर्मचारी अपने-अपने कार्यस्थलों पर काली पट्टी बांधकर विरोध प्रदर्शन करेंगे। इस दौरान कर्मचारी नियमित कार्य करते हुए शासन और विभाग के प्रति नाराजगी जताएंगे।
दूसरा चरण – सांकेतिक धरना
आंदोलन के दूसरे चरण में 18 मई 2026 को भोजन अवकाश के दौरान मुख्य वन संरक्षक कार्यालय, बिलासपुर वृत्त के सामने सांकेतिक धरना प्रदर्शन किया जाएगा। इसमें बड़ी संख्या में कर्मचारियों के शामिल होने की संभावना जताई जा रही है।
तीसरा चरण – पूर्ण कार्य बंद
यदि इसके बाद भी मांगों पर कार्रवाई नहीं होती है तो 25 मई 2026 को कर्मचारी एक दिवसीय अवकाश लेकर पूर्ण कार्य बंद करेंगे। इससे वन विभाग के नियमित कार्य प्रभावित हो सकते हैं।
चौथा चरण – अनिश्चितकालीन हड़ताल
संघ ने चेतावनी दी है कि यदि इसके बाद भी कर्मचारियों की समस्याओं का समाधान नहीं हुआ तो अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू की जाएगी।
संघ ने पत्र में स्पष्ट किया है कि आंदोलन के दौरान उत्पन्न होने वाली परिस्थितियों की जिम्मेदारी शासन और प्रशासन की होगी, यह पत्र छत्तीसगढ़ वन कर्मचारी संघ, संभाग बिलासपुर के अध्यक्ष प्रीतम कुमार पुरैने के हस्ताक्षर से जारी किया गया है। पत्र की प्रतिलिपि वन कर्मचारी संघ रायपुर, प्रधान मुख्य वन संरक्षक, संभागीय आयुक्त, जिला कलेक्टर एवं वन विभाग के अन्य अधिकारियों को भी भेजी गई है।
