बिलासपुर– जिले के अंतर्गत सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन करने वाले हितग्राहियों के अधिकारों पर शासकीय उचित मूल्य दुकान के संचालकों द्वारा डाकेबाजी कर पीडीएस चावल की अफरा तफरी करने का काम धड़ल्ले से किया जा रहा है और उतनी ही गहरी नींद में सरकारी मुलाजिम (खाद्य विभाग) के अधिकारी और निरीक्षक सोए नजर आ रहे हैं.. मामला मीडिया में उजागर होने के बाद भी कार्रवाई नहीं होना विभागीय संरक्षण होने का संदेह और भी गहरा जाता है..

बीते दिनों बिलासपुर की कोतवाली पुलिस ने सट्टा का काला कारोबार करने के मामले में कार्रवाई करते हुए दो आरोपियों को गिरफ्तार किया था जिसमें से एक आरोपी दीपक भगतानी जूना बिलासपुर कतियापारा में राशन दुकान का संचालन करता है, सट्टे के खेल में पुलिस से मात खाने के बाद शासकीय उचित मूल्य का संचालक और कथाकथित मालिक दीपक भगतानी क्षेत्र की जनता के पेट पर डाकेबाजी करने लगा और शासन द्वारा रजत जयंती चावल उत्सव के दौरान 3 माह का एकमुश्त चावल पर घपलेबाजी करते हुए चावल को ऑटो के माध्यम से दलाल को पहुंचाने लगा..

सट्टेबाज दुकानदार की ये करतूत बकायदा मीडिया के कैमरे में कैद भी हुई लेकिन सट्टेबाज दुकानदार पर कोई कार्रवाई नहीं की गई..  इस दौरान खबर के जरिए शहर की फूड इंस्पेक्टर वर्षा सिंह को भी जानकारी मिली, लेकिन सरकार के काम से ज्यादा जरूरी जिम्मेदारी शायद अधिकारी कर्मचारी अफरा तफरी करने वाले व्यापारी दुकानदार और राइस मिलरो की निभाते है? इसलिए तो आंखों से मामला देखने के बाद भी कार्रवाई के नाम पर जीरो बटा सन्नाटा ही होता है..

बड़ा सवाल उठता है कि, पुलिस ने जिस सट्टेबाज को सट्टे के मामले में जेल भेजा था तो चावल की अफरा तफरी के मामले में कार्रवाई क्यों नहीं की गई, क्या चावल की अफरा तफरी रोकने की जिम्मेदारी भी खाद्य विभाग से लेकर पुलिस को दे दी जानी चाहिए ताकि खाद्य विभाग के निरीक्षक और अधिकारियो की गहरी नींद खराब न हो और उनके दामन पर संरक्षण का दाग न लगे.