बिलासपुर- प्रदेश समेत जिले में इन दिनों शराब आपूर्ति व्यवस्था पूरी तरह लड़खड़ाई हुई नजर आ रही है। शहर से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों तक संचालित कई शराब दुकानों में मनपसंद ब्रांड उपलब्ध नहीं हैं। स्थिति यह है कि शराब प्रेमियों को दुकानों के चक्कर लगाने के बावजूद अपनी पसंद की अंग्रेजी और देशी शराब नहीं मिल पा रही है। खासकर लोअर और मिड रेंज की अंग्रेजी शराब के साथ-साथ देशी शराब का भी कई दुकानों में भारी संकट बना हुआ है..

शराब दुकानों पर पहुंचने वाले उपभोक्ताओं को या तो दूसरा ब्रांड लेने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है या फिर खाली हाथ लौटना पड़ रहा है, कई दुकानों में काउंटर पर सीमित ब्रांड ही दिखाई दे रहे हैं, जबकि लोकप्रिय ब्रांडों का स्टॉक दिनों से खत्म बताया जा रहा है। दुकानदारों और कर्मचारियों के अनुसार लगातार सप्लाई प्रभावित होने के कारण स्थिति सामान्य नहीं हो पा रही है..

इधर आबकारी विभाग भी व्यवस्था को संभालने के लिए अलग-अलग दुकानों के बीच उपलब्ध स्टॉक का समायोजन कर रहा है.. विभागीय अमला इस कोशिश में लगा है कि किसी भी दुकान में पूरी तरह शराब खत्म न हो, लेकिन आपूर्ति बाधित होने के कारण संतुलन बनाए रखना मुश्किल हो रहा है। बताया जा रहा है कि सप्लाई चेन में आई दिक्कतों और ब्रांड उपलब्धता की समस्या के चलते पूरे जिले में यह हालात बने हुए हैं..

सबसे दिलचस्प बात यह है कि जमीन पर शराब संकट दिखाई देने के बावजूद सरकारी राजस्व पर इसका कोई नकारात्मक असर नहीं पड़ा है। उल्टा आबकारी विभाग की कमाई पिछले वर्ष की तुलना में बढ़ गई है। विभाग से प्राप्त आंकड़ों के मुताबिक वित्तीय वर्ष 2025-26 में मई माह के पहले 11 दिनों के भीतर जिले में शराब बिक्री से 35 करोड़ 31 लाख 70 हजार 851 रुपए का राजस्व प्राप्त हुआ था। वहीं वर्ष 2026 में 11 मई तक आबकारी विभाग को 38 करोड़ 02 लाख 14 हजार 840 रुपए का राजस्व प्राप्त हो चुका है। यानी पिछले वर्ष की तुलना में करीब 8 प्रतिशत अधिक आय दर्ज की गई है..
राजस्व में बढ़ोतरी को लेकर विभागीय हलकों में अलग-अलग चर्चाएं भी शुरू हो गई हैं। माना जा रहा है कि स्टॉक की कमी के बीच उपभोक्ता उपलब्ध महंगे ब्रांड खरीदने को मजबूर हो रहे हैं, जिसका सीधा असर राजस्व पर दिखाई दे रहा है। वहीं कुछ लोग इसे शराब की बढ़ती खपत से भी जोड़कर देख रहे हैं..
हालांकि शराब दुकानों में लगातार बनी अव्यवस्था से आम उपभोक्ता परेशान हैं। कई जगहों पर ग्राहकों और दुकान कर्मचारियों के बीच बहस की स्थिति भी बन रही है। लोगों का कहना है कि जब सरकार को शराब बिक्री से करोड़ों का राजस्व मिल रहा है तो फिर दुकानों में पर्याप्त स्टॉक और ब्रांड उपलब्ध क्यों नहीं कराए जा रहे हैं..
विभागीय सूत्रों के मुताबिक मई माह के अंतिम सप्ताह तक शराब आपूर्ति व्यवस्था सामान्य होने की उम्मीद जताई जा रही है। इसके साथ ही यह दावा भी किया जा रहा है कि जल्द ही दुकानों में लोगों को उनका पसंदीदा ब्रांड फिर से उपलब्ध होने लगेगा..
