शादी का झांसा देकर दुष्कर्म के चर्चित मामले में बिलासपुर की विशेष एससी-एसटी अदालत ने आरोपी राघव सिंह ठाकुर को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया है.. विशेष न्यायाधीश लवकेश प्रसाद सिंह बघेल की अदालत ने अपने फैसले में कहा कि, अभियोजन पक्ष आरोपी के खिलाफ लगाए गए आरोपों को संदेह से परे साबित करने में असफल रहा.. प्रकरण में पीड़िता ने आरोप लगाया था कि आरोपी ने शादी का वादा कर कई वर्षों तक उसके साथ शारीरिक संबंध बनाए। मामले में भारतीय दंड संहिता की धारा 376(2)(एन) तथा अनुसूचित जाति एवं जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम की धारा 3(2)(v) के तहत अपराध दर्ज किया गया था। मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने दोनों पक्षों के बयान, दस्तावेज और परिस्थितियों का परीक्षण किया..
निर्णय में अदालत ने उल्लेख किया कि पीड़िता एक शिक्षित और वयस्क महिला थी तथा वह एक शिक्षिका के पद पर कार्यरत थी, अदालत ने कहा कि पीड़िता यह समझने में सक्षम थी कि बिना विवाह किसी व्यक्ति के साथ संबंध बनाने का क्या अर्थ होता है, न्यायालय ने अपने आदेश में यह भी कहा कि रिकॉर्ड में ऐसा कोई ठोस प्रमाण प्रस्तुत नहीं किया गया जिससे यह सिद्ध हो सके कि आरोपी ने झूठा विवाह का प्रलोभन देकर जबरन संबंध बनाए, अदालत ने माना कि अभियोजन यह साबित नहीं कर सका कि आरोपी ने पीड़िता की सहमति भ्रमित कर प्राप्त की थी। न्यायालय ने यह भी कहा कि दोनों के बीच संबंध स्वैच्छिक प्रतीत होते हैं। इसी आधार पर अदालत ने आरोपी राघव सिंह ठाकुर को सभी आरोपों से दोषमुक्त कर दिया.. फैसले के साथ अदालत ने आरोपी के जमानत मुचलके निरस्त करने तथा जप्त सामग्री के निराकरण के संबंध में भी निर्देश जारी किए हैं..
