श्री राधारानी के जन्मोत्सव पर भक्तों में उमंग, इस तरह से करें राधारानी की आराधना, होगी विशेष कृपा.. जानिए पूजा विधि, महत्व और शुभ मुहूर्त..

बिलासपुर– भाद्रपद शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को श्रीराधा रानी का जन्मोत्सव मनाया जाता है, जिसे राधाष्टमी कहा जाता है, यह दिन वैष्णव परंपरा और ब्रजभूमि के लिए विशेष महत्व रखता है, माना जाता है कि श्रीराधा, भगवान श्रीकृष्ण की आह्लादिनी शक्ति एवं भक्ति स्वरूपा हैं, इस वर्ष 31 अगस्त को राधाष्टमी का पर्व पूरे देशभर में श्रद्धा और भक्ति भाव के साथ मनाया जा रहा है..
राधाष्टमी का धार्मिक महत्व..
राधाष्टमी को लेकर पुराणों में उल्लेख मिलता है कि श्रीराधा बिना भगवान श्रीकृष्ण अधूरे हैं और श्रीकृष्ण बिना श्रीराधा के पूजन से प्रसन्न नहीं होते। भक्तजन मानते हैं कि राधारानी भक्ति, प्रेम, करुणा और त्याग की मूर्ति हैं, इस दिन श्रद्धापूर्वक पूजा और व्रत करने से मनचाहा फल प्राप्त होता है, दांपत्य जीवन में सुख-शांति बनी रहती है और संतान सुख की प्राप्ति होती है..
राधाष्टमी की पूजा विधि..
राधाष्टमी के दिन प्रातःकाल स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें, पूजा स्थल को गंगाजल से शुद्ध कर श्रीराधा-कृष्ण की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें..रोली, चंदन, पुष्प, धूप-दीप और अक्षत से पूजन करें, विशेष रूप से गुलाब और तुलसी दल अर्पित करना अत्यंत शुभ माना जाता है.. राधारानी को पीले या गुलाबी वस्त्र पहनाकर श्रृंगार करें.. भोग में माखन-मिश्री, फल और दूध से बनी मिठाई चढ़ाएँ.. दिनभर श्रीराधा के मंत्र “राधायै स्वाहा” का जप करें.. संध्या समय आरती और भजन-कीर्तन का आयोजन कर व्रत का समापन करें..
राधाष्टमी व्रत नियम..
भक्तजन राधाष्टमी के दिन निर्जला उपवास या फलाहार व्रत रखते हैं, इस दिन सात्विकता का पालन करना चाहिए और मन, वचन तथा कर्म से राधा-कृष्ण का स्मरण करना चाहिए। मान्यता है कि व्रत करने से जीवन में आने वाली बाधाएँ दूर होती हैं और मनोकामनाएँ पूर्ण होती हैं..
पौराणिक कथा..
पौराणिक मान्यता के अनुसार, व्रजभूमि के बरसाना गांव में वृषभानु गोप और माता कीर्ति के घर श्रीराधा का अलौकिक जन्म हुआ, जन्म के समय राधा जी की आंखें बंद थीं.. कहा जाता है कि जब भगवान श्रीकृष्ण ने पहली बार उन्हें देखा तब उनकी आंखें खुलीं। इसी कारण से राधा को भगवान की आह्लादिनी शक्ति और प्रेम स्वरूपा माना गया है..
उत्सव की झलक..
बिलासपुर और आसपास के मंदिरों में राधाष्टमी के अवसर पर विशेष झांकी, भजन-कीर्तन और प्रसाद वितरण का आयोजन किया गया है, भक्तजन सुबह से ही मंदिरों में पहुंचकर राधा-कृष्ण का दर्शन कर आशीर्वाद ले रहे हैं, कई जगह अखंड नामस्मरण और संकीर्तन का आयोजन किया जा रहा है..



