स्वतंत्र अवाज विशेष
बिरकोना राशन दुकान का किस्सा.. दुकान संचालक, प्रबंधक, विभाग में किसका कितना हिस्सा?.. भ्रष्टाचारी पर रहमत की बरसात, हितग्राहियों पर राशन की आफत.. चर्चित दुकान का अब तक नहीं हुआ भौतिक सत्यापन..
बिलासपुर– जिले में गरीब जनता को राशन की व्यवस्था करने वाले शासकीय उचित मूल्य दुकान के संचालको के हौसले जमकर बुलंद नजर आ रहे हैं, खाद्य विभाग का संरक्षण के चलते गरीब जनता को उनके हक के राशन के लिए दरबदर भटकना पड़ रहा है, इतना ही नहीं प्रबंधक कौशिक और विक्रेता दिनेश यादव के हौसले भी बुलंद है, जनता का अंगूठा लगवाकर उनके राशन कार्ड को कब्जे में रख लिया जाता है ताकि हितग्राही दूसरे दुकानों से राशन न ले सकें, लेकिन हितग्राहियों की पीड़ा प्रशासन में बैठे अधिकारियों को दिखाई नही दे रही है, भौतिक सत्यापन के आड़ में जांच कम और सेटलमेंट ज्यादा हो रहा है..
शासन के निर्देशानुसार जिले के राशन दुकानों में 10 अप्रैल तक भौतिक सत्यापन का कार्य पूरा करना था लेकिन अब यह कार्य पूरा नहीं किया जा सका है, खासकर उन दुकानों के भौतिक सत्यापन नहीं किए गए है जहां चावल गबन की मुख्य शिकायत है, बिरकोना के सेवा सहकारी समिति मर्या. द्वारा संचालित राशन दुकान का संचालन करने वाले दिनेश यादव ने 31 मार्च को कई हितग्राहियों से अंगूठा लगवाया फिर उन्हें वापस भेज दिया, (जबकि अगर हितग्राही उस महीने का राशन नहीं लेता तो आबंटन वापस हो जाता है, कोई भी दुकानदार पिछले महीने का राशन अगले महीने नहीं बांट सकता.. इसका मतलब है कि 31 मार्च को जो भी हितग्राही अंगूठा लगाया होगा उसे राशन देना चाहिए था, बड़ा सवाल यह है कि, अगर दुकानदार ने उन्हें राशन नहीं दिया तो वह गया कहां..)
मार्च का राशन दबाने वाले प्रबंधक कौशिक और दुकान संचालक दिनेश यादव ने अप्रैल माह में भी बीते 15 अप्रैल को सुबह से दुकान खोलकर सिर्फ़ अंगूठा लेने का काम किया लेकिन राशन नहीं बांटा, जिसकी जानकारी विभागीय अधिकारी अनुराग सिंह भदौरिया और शहर के चर्चित खाद्य निरीक्षक मंगेश कांत को भी है लेकिन अब तक इस मामले में जांच तक नहीं की गई है और न ही हितग्राहियों को मार्च माह का राशन मिल पाया है, इतना ही नाम न बताने के शर्त पर एक हितग्राही ने बताया कि, दुकान संचालक दिनेश यादव और प्रबंधक कौशिक खाद्य निरीक्षक मंगेश कांत के खास होने का दावा करते हैं और जब हितग्राहियों को राशन चाहिए होता है तो अपनी मनमर्जी चलाते है..
जिले के राशन दुकानों का भौतिक सत्यापन किया जा रहा है एक महीने पहले ही दुकानदारों को विभागीय अधिकारियों द्वारा रिकार्ड दुरुस्त करने और अंतर और अतिरिक्त चावल को ठीक करने का निर्देश भी दे दिया गया था, कई दुकानदारों द्वारा चावल के अंतर को कम करने के लिए हितग्राहियों को या तो चावल के बदले पैसे दे रहे है या राशन बाद में देने का वादा कर हितग्राहियों का अंगूठा लेकर उन्हें रवाना कर दिया जा रहा है..
बिरकोना राशन दुकान के संचालक द्वारा भी इसी कार्रवाई से बचने के लिए इसी प्रकार का हथकंडा अपनाया जा रहा है, इसमें विभागीय अधिकारी की उसकी सहायता कर रहे है, जानकारी के लिए जब हमारे द्वारा दो दिनों से खाद्य निरीक्षक मंगेश कांत को फोन लगाया है, उन्होंने फोन उठाना भी जरूरी नहीं समझा, ऐसे में उम्मीद लगाई जा सकती है कि, खाद्य निरीक्षक अपनी जिम्मेदारी को लेकर कितने गंभीर होंगे.. दूसरी ओर दुकानदार द्वारा हितग्राहियों को राशन नहीं बांटने की जानकारी होने के बाद भी कार्रवाई न किया जाना कितनी बड़ी लापरवाही या संरक्षण हो सकता है यह सोचने वाली बात है,



