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नकल प्रकरण को लेकर एनएसयूआई ने की एफआईआर की मांग.. जिला अध्यक्ष रंजीत सिंह के नेतृत्व में एनएसयूआई ने महर्षि यूनिवर्सिटी के खिलाफ़ खोला मोर्चा..
बिलासपुर– एनएसयूआई जिलाध्यक्ष रंजीत सिंह द्वारा महर्षि यूनिवर्सिटी ऑफ मैनेजमेंट एंड टेक्नोलॉजी की विभिन्न बिंदुओं में शिकायत कर बिलासपुर कलेक्टर अवनीश कुमार शरण को जांच कर कार्रवाई करने हेतु ज्ञापन सौंपा गया.. एनएसयूआई जिलाध्यक्ष रंजीत सिंह ने कलेक्टर अवनीश कुमार शरण को निम्नलिखित 10 बिंदुओं पर महर्षि यूनिवर्सिटी प्रबंधन की शिकायत दर्ज कराई है जो इस प्रकार हैं –
1. मुख्य परीक्षाओं में खुलेआम नकल कराना (नकल प्रकरण)
2. एक ही भवन जमीन स्टाफ सभी संसाधन को लेकर कैंपस में दो संस्था का संचालन करना
3. महर्षि यूनिवर्सिटी के कैम्पस के बाहर सेंटर का संचालन
4. फर्जी स्टॉफ प्रोफाईल दर्शाकर मान्यता लेना
5. महर्षि यूनिवर्सिटी में मात्र गिनती के प्राध्यापकों का होना
6. महर्षि यूनिवर्सिटी के कुलपति का कूट रचित दस्तावेज़ के आधार पर नियुक्त होना
7. महर्षि यूनिवर्सिटी में गर्ल्स हॉस्टल का ना होना
8. लाइब्रेरी/लैब/स्पोर्ट/कैंटीन/सांस्कृतिक कार्यक्रम का अभाव
9. महर्षि यूनिवर्सिटी पीएचडी /रिसर्च/रिसर्च गाइड/ को लेकर यूजीसी के नियमों का उलघन करना
10. महर्षि यूनिवर्सिटी निजी स्वार्थ के लिए स्कॉलरशिप में फर्जीवाडा कर राज्य शासन को वित्तीय क्षति पहुंचाना
इसके पश्चात एनएसयूआई जिलाध्यक्ष रंजीत सिंह द्वारा प्रेस वार्ता कर बताया कि महर्षि यूनिवर्सिटी प्रबंधन के विरुद्ध पूर्व में भी अनेकों बार शिकायत प्रधानमंत्री कार्यालय,विश्वविद्यालय अनुदान आयोग,शिक्षा मंत्रालय भारत सरकार,मुख्यमंत्री छत्तीसगढ़ शासन,उच्च शिक्षा मंत्री छत्तीसगढ़ शासन, सीजीपीयूआरसी और राज्यपाल छत्तीसगढ़ कार्यालय में किया गया है किंतु अभी तक किसी भी कार्यालय द्वारा कोई भी निर्णायक कार्रवाई नहीं किया गया है कुछ माह पूर्व आदिम जाति कल्याण विभाग बिलासपुर के सहायक आयुक्त द्वारा छात्रवृत्ति घोटाले मामले में जांच समिति बनाकर जांच कराया गया जिसमें महर्षि यूनिवर्सिटी प्रबंधन को पूर्णतः गलत पाया गया जिसके कारण वहां की छात्रवृत्ति सुविधा पर रोक लगा दिया गया है..
रंजीत सिंह ने प्रेस वार्ता में यह भी कहा कि यह महर्षि यूनिवर्सिटी लगातार छात्र विरोधी गतिविधियों में संलिप्त रही है और अनेकों भ्रष्टाचार और अनियमितताओं के साथ नियम विरुद्ध संचालन कर अध्ययनरत हजारों विद्यार्थियों का भविष्य अंधकार में डालने का काम कर रही है इन्ही सभी अपराधिक और नियमविरुद्ध गतिविधियों के कारण यह महर्षि यूनिवर्सिटी सत्र 2014-15 में बंद कर दी गई थी इसके पश्चात जब यह विश्वविद्यालय 2019 -20 में पुनः संचालित की गई और अभी भी यह अपने अड़ियल रवैया का परिचय देते हुए केवल आर्थिक लाभ हेतु शिक्षा का व्यापार कर रही है। जिस पर रोक लगाने हेतु हमारे द्वारा भरकस प्रयास किया जा रहा है किंतु महर्षि यूनिवर्सिटी पर कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है। कार्रवाई न होने का कारण रंजीत सिंह ने यह बताया कि महर्षि यूनिवर्सिटी के चांसलर गिरिस चंद्र वर्मा का भाजपा के अनेक बड़े नेताओं और आरएसएस प्रमुख के साथ घनिष्ट सम्बन्ध को बताया है..
प्रेस कॉन्फ्रेंस में रंजीत सिंह द्वारा लगाए गए सभी आरोपों को सिद्ध करने हेतु सभी के साक्ष्य प्रस्तुत कर उचित दस्तावेज भी उपलब्ध कराए गए जिसमें महर्षि यूनिवर्सिटी प्रबंधन की सभी भ्रष्टाचार सबके सामने उजागर हो सके, रंजीत सिंह ने आज सौंपे गए ज्ञापन पर कार्रवाई नहीं होने की स्थिति में 15 दिवस के पश्चात न्यायालय का शरण लेकर ऐसे भ्रष्ट यूनिवर्सिटी पर जांच कर कार्रवाई करने एवं अध्ययनरत हजारों विद्यार्थियों के भविष्य को सुरक्षित करने की मांग करेंगे.. आज के कलेक्टर को ज्ञापन सौंपने एवं प्रेस वार्ता में मुख्य रूप से प्रदेश सचिव लोकेश नायक,जिला उपाध्यक्ष सुमित शुक्ला,जिला महासचिव शुभम जायसवाल,विपिन साहू,जिला महासचिव प्रवीण साहू,जिला महासचिव शिवांश पाठक, जिला सचिव उमेश चंद्रवंशी आदि एनएसयूआई के पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता उपस्थित रहे..



