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स्वास्थ्य कर्मचारियों की बर्खास्तगी वापस लेने और 5 सूत्रीय मांगो को लेकर स्वास्थ्य कर्मियों का प्रदेशभर में प्रदर्शन.. छत्तीसगढ़ कर्मचारी-अधिकारी फेडरेशन ने किया समर्थन..

बिलासपुर– छत्तीसगढ़ में सरकार द्वारा स्वास्थ्य कर्मियों की बर्खास्तगी के बाद घमासान मचा हुआ है। जिले समेत प्रदेश भर में बड़ी संख्या में स्वास्थ्य कर्मचारी अलग-अलग मांगों को लेकर हड़ताल में बैठे हुए थे जिसके बाद शान द्वारा जिले में 205 और प्रदेश भर में 3000 से अधिक स्वास्थ्य कर्मियों को बर्खास्त कर दिया गया जिसके बाद अब बर्खास्त स्वास्थ्य कर्मियों के समर्थन में छत्तीसगढ़ कर्मचारी अधिकारी फेडरेशन के सदस्य प्रदर्शन करने उतर गए हैं। सोमवार को बड़ी संख्या में स्वास्थ्य कर्मचारियों के साथ छत्तीसगढ़ कर्मचारी एवं अधिकारी फेडरेशन के लोग कलेक्टर को ज्ञापन सौंपने पहुंचें जहां उन्होंने बिलासपुर कलेक्टर को मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा और बर्खास्त किए गए स्वास्थ्य कर्मियों के बर्खास्तगी को वापस लेने की मांग की..

छत्तीसगढ़ हेल्थ फेडरेशन से संबद्ध 12 संगठनों द्वारा वेतन विसंगति सहित 5 सूत्रीय जायज मांगों को लेकर 21 अगस्त से शासन को विधिवत सूचना देकर अनिश्चितकालीन आंदोलन किया जा रहा है। आंदोलन में शामिल स्वास्थ्य चिकित्सक, ग्रामीण स्वास्थ्य संयोजक (ए.एन.एम / एम. पी. डब्ल्यू) एवं नर्सिंग संवर्ग से जूड़े समस्त कर्मचारी संगठन लगातार शासन को कई बार उच्च पदस्थ अधिकारियों से मिलकर अपनी समस्यओं से अवगत करा चुके है। लेकिन किसी भी तरह की सुनवाई नहीं होने पर लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन करने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। इन संगठनों के द्वारा पूर्व में किये गये आंदोलन को संज्ञान में लेते हुए शासन स्तर पर कमेटी भी बनाई गई है। लेकिन कमेटी द्वारा आज तक रिपोर्ट को शासन को नहीं सौपी गई है।
प्रदेश की आम जनता भली भांति जानती है कि वैश्विक महामारी कोरोना के संक्रमण को रोकने के लिए प्रदेश के चिकित्सक, नर्सिंग संवर्ग एवं ग्रामीण स्वास्थ्य संयोजकों ने अपनी जान को जोखिम में डालकर हजारों लोगों को मौत के गाल से समाने से बचाये थे। प्रदेश के अनेक स्वास्थ्य कर्मी आम लोगों की सेवा करते हुए कोरोना सर्वमित होकर इस दुनिया से चले गए। प्रदेशभर में कोरोना योद्धाओं के सम्मान में फूलों की वर्षा कर तालियां बजाकर जगह जगह सम्मान दिया गया था। शासन द्वारा कोरोना योद्धाओं के सम्मान में कई वादे भी किये गये, लेकिन ये वादे सिर्फ कागजी कार्यवाही तक सिमट कर रह गये। प्रदेश सरकार द्वारा छत्तीसगढ़ हेल्थ फेडरेशन से संवाद कर मांगों के निराकरण करने के बजाय ऐसे कोरोना योद्धाओं के खिलाफ एस्मा कानून के तहत निलंबन, बर्खास्तगी एवं एफ.आई. आर. की कार्यवाही की जा रही है। सरकार द्वारा इस तरह की दमनात्मक कार्यवाही से आम लोगों में आक्रोश भी बढ़ते जा रहा है।
इस मामले में छत्तीसगढ़ कर्मचारी अधिकारी फेडरेशन प्रदेश के संवेदनशील मुख्यमंत्री से निवेदन करते हुए कहा है कि हेल्थ फेडरेशन के हड़ताली कर्मचारियों के विरूद्ध की गई दमनात्मक कार्यवाही को वापस लेते हुए परस्पर संवाद के माध्यम से सभी जायज मांगों के समाधान करने जल्द से जल्द आवश्यक कार्यवाई करें।

आधिकारी और कर्मचारी फेडरेशन के संभाग अध्यक्ष ने जानकारी देते हुए बताया कि, बर्खास्तगी और निलम्बन हुआ है हमारे 7 फेडरेशन ने बड़ा निर्णय लिया है, अगर ये बर्खास्तगी वापस नही होती है तो पूरे प्रदेश भर में स्वास्थ्य फेडरेशन के कर्मचारी अधिकारी सामूहिक रूप से इस्तीफा देने के लिए प्रारूप तैयार है। सरकार ने बिना कोई चर्चा किये एक तरफा बर्खास्तगी की कार्यवाई की है इसका फेडरेशन निंदा करता है और आज मुख्यमंत्री को ज्ञापन सौंपा गया है..

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