अंधकार पर प्रकाश की विजय का पर्व दीपावली.. पूजा विधि, राशि अनुसार मंत्र और इस तरह दीप प्रज्वलित करने से होगा अत्यंत लाभ.. ज्योतिषाचार्य से जानें पूरी जानकारी..
अंधकार पर प्रकाश की विजय का पर्व दीपावली इस वर्ष सोमवार, 20 अक्टूबर 2025 को पूरे देश में धूमधाम से मनाई जाएगी..

बिलासपुर/डेस्क– रोशनी, उमंग और श्रद्धा का पर्व दीपावली शहर में पूरे जोश के साथ मनाया जा रहा है, दीपावाली की रौनक हर तरफ दिखाई दे रही है, मिठाइयों की दुकानों पर भीड़ और सजावटी सामग्रियों की चमक हर ओर नजर आई.. शाम होते ही घरों के आंगन दीपों से जगमगा उठे और हवा में खुशियों की मिठास घुल गई.. अंधकार पर प्रकाश की विजय का पर्व दीपावली इस वर्ष सोमवार, 20 अक्टूबर 2025 को पूरे देश में धूमधाम से मनाई जाएगी.. पंचांग के अनुसार यह दिन अमावस्या तिथि, मृगशिरा नक्षत्र और प्रदोष काल का संगम लेकर आएगा, जो मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा के लिए अत्यंत शुभ माना गया है..
शुभ मुहूर्त और पूजा का समय..
इस वर्ष मां लक्ष्मी-गणेश पूजा का शुभ मुहूर्त, शाम 7:08 बजे से रात 8:18 बजे तक रहेगा.. प्रदोष काल और मृगशिरा नक्षत्र का संयोग इस बार अत्यंत शुभ माना गया है, इस मुहूर्त में की गई लक्ष्मी पूजा से साल भर सुख-समृद्धि बनी रहती है और घर में धन-वृद्धि के योग बनते हैं..
पूजा की चरणबद्ध विधि..
“ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं महालक्ष्म्यै नम:”
इस मंत्र से मां लक्ष्मी और भगवान गणेश का आवाहन करें,
दीपक जलाकर दोनों के समक्ष आसन बिछाएं,
मूर्ति या चित्र को गंगाजल, दूध और केसर मिले जल से स्नान कराएं, फिर उन्हें लाल या गुलाबी वस्त्र पहनाएं..
पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद, शक्कर) से अभिषेक करें,
फिर शुद्ध जल से स्नान करवाएं..
फूल, अक्षत (चावल), इत्र, और गुलाल से श्रृंगार करें, कमल पुष्प, चांदी का सिक्का, और नई तिजोरी या बहीखाता रखें..
मां लक्ष्मी को खीर, नारियल, बताशे, कमल गट्टा और मीठे पान अर्पित करें, गणेश जी को मोदक या लड्डू चढ़ाएं..
दीप जलाकर यह आरती करें..
“ॐ जय लक्ष्मी माता, मैया जय लक्ष्मी माता…” आरती के बाद कपूर जलाकर पूरे घर में घुमाएं..
पूजा के दौरान कम से कम 108 बार “ॐ ह्रीं श्रीं लक्ष्म्यै नमः” मंत्र का जप करें, अगर संभव हो तो कुबेर मंत्र भी जपें —
“ॐ यक्षाय कुबेराय वैश्रवणाय धनधान्याधिपतये नमः॥”
पूजा के बाद घर के हर कोने में दीप जलाएं..
एक दीप तिजोरी या धनस्थान पर, एक मुख्य द्वार पर, एक तुलसी चौरा पर, एक रसोई में, एक दक्षिण दिशा में (पितरों के लिए),
पूजा के दौरान यह मुख्य मंत्र जपें —“ॐ ह्रीं श्रीं लक्ष्म्यै नम:”
अंत में आरती करें और घर के प्रत्येक कोने में दीप जलाएं..
राशि अनुसार पूजा के रंग और मंत्र..
मेष- लाल– “ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः” लाल फूल चढ़ाएं
वृषभ – सफेदf– “ॐ पद्मायै नमः” दूध-मिश्रित खीर अर्पित करें
मिथुन- हरा– “ॐ ह्रीं श्रीं नमः” तुलसी का दीप जलाएं
कर्क- चांदी, नीला– “ॐ चन्द्राय नमः” चांदी का सिक्का रखें
सिंह- सुनहरा– “ॐ धन्यायै नमः” गुड़ और गेहूं का भोग लगाएं
कन्या- पीला– “ॐ ऐं श्रीं नमः” हल्दी और पीले पुष्प चढ़ाएं
तुला- गुलाबी– “ॐ ह्रीं लक्ष्म्यै नमः” गुलाब की माला अर्पित करें
वृश्चिक- लाल-केसरिया “ॐ क्लीं श्रीं नमः” कपूर से आरती करें
धनु- पीला– “ॐ महालक्ष्म्यै नमः” पीले वस्त्र पहनें
मकर- नीला– “ॐ क्लीं ह्रीं नमः” काले तिल का दीपक जलाएं
कुम्भ- सलेटी– “ॐ श्रीं नमः” जल से भरा कलश रखें
मीन- हल्का पीला– “ॐ ह्रीं नमः” घी का दीप जलाएं
पौराणिक कथा..
पौराणिक मान्यता है कि समुद्र मंथन के दौरान मां लक्ष्मी प्रकट हुईं और उसी दिन से दीपोत्सव का आरंभ हुआ, कहा जाता है कि श्रीराम जब लंका विजय के बाद अयोध्या लौटे, तो नगरवासियों ने दीप जलाकर उनका स्वागत किया तभी से दीपावली प्रकाश और विजय का प्रतीक बनी..
ज्योतिषाचार्य की सलाह..
स्थानीय ज्योतिषाचार्य बताते हैं कि “दीपावली के दिन एक दीपक दक्षिण दिशा में जलाना पितरों के लिए शुभ होता है,
एक दीपक तिजोरी या धन स्थान पर, और एक घर के मुख्य द्वार पर, यह तीनों दिशाओं का संतुलन बनाकर घर में सकारात्मक ऊर्जा लाते हैं..
त्योहार का संदेश..
दीपावली सिर्फ दीयों का पर्व नहीं, बल्कि दिलों में रोशनी भरने का अवसर है,
प्रकाश के इस पर्व पर हर घर में दीप जले, पर किसी की उम्मीद बुझने न पाए यही इस दीवाली का असली अर्थ है..



