छत्तीसगढ़

रतनपुर में राष्ट्रीय धरोहर संरक्षित इमारत में अवैध उत्खनन का सनसनीखेज मामला.. पुरातत्व विभाग की शिकायत पर पुलिस ने रोका अवैध उत्खनन, चेतावनी के बाद छोड़ा गया स्थानीय नेता..

कांग्रेस ग्रामीण जिला अध्यक्ष पद के दावेदार और पीसीसी सदस्य नीरज जायसवाल पर आरोप है कि उन्होंने बिना अनुमति मजदूरों से खुदाई का कार्य करवाया..

बिलासपुर/रतनपुर– राष्ट्रीय महत्व के संरक्षित स्मारक गज किला में अवैध उत्खनन का सनसनीखेज मामला सामने आया है.. कांग्रेस ग्रामीण जिला अध्यक्ष पद के दावेदार और पीसीसी सदस्य नीरज जायसवाल पर आरोप है कि उन्होंने बिना अनुमति मजदूरों से खुदाई का कार्य करवाया। भारतीय पुरातत्त्व सर्वेक्षण (ASI) की शिकायत पर रतनपुर पुलिस ने मौके पर पहुंचकर उत्खनन कार्य को तत्काल रुकवाया और मजदूरों को थाने लाकर पूछताछ की..

मिली जानकारी के अनुसार, नीरज जायसवाल द्वारा गज किला परिसर की बाउंड्री वॉल के भीतर, जो कि एएसआई के तहत संरक्षित क्षेत्र है, अवैध तरीके से खुदाई कराई जा रही थी। जब पुरातत्व विभाग के अधिकारी मौके पर पहुंचे और कार्य बंद करने का निर्देश दिया, तो मजदूरों ने काम रोकने से इनकार कर दिया। इसके बाद विभाग की शिकायत पर पुलिस ने हस्तक्षेप किया..

पुलिस के पहुंचते ही मजदूरों से पूछताछ की गई और अवैध निर्माण कार्य को रोक दिया गया। कुछ ही देर बाद नीरज जायसवाल स्वयं थाने पहुंचे और उन्होंने पुलिस के सामने सरेंडर करते हुए यह वचन दिया कि भविष्य में कोई अवैध कार्य नहीं करेंगे। पुलिस ने उन्हें चेतावनी देकर छोड़ दिया..

पुरातत्व विभाग के अधिकारियों ने बताया कि यह कार्य सुप्रीम कोर्ट के आदेशों और “प्राचीन स्मारक एवं पुरातात्त्विक स्थल तथा अवशेष अधिनियम, 1958” का खुला उल्लंघन है। अधिनियम के तहत संरक्षित स्मारक की सीमा से 100 मीटर के भीतर किसी भी प्रकार का निर्माण, तोड़फोड़ या खुदाई पूर्णतः प्रतिबंधित है, जबकि 200 मीटर की परिधि में किसी भी निर्माण के लिए संस्कृति एवं पुरातत्व विभाग से पूर्व अनुमति आवश्यक होती है..

ASI की शिकायत में कहा गया है कि न केवल सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की अवहेलना की गई, बल्कि स्थानीय प्रशासन की छवि को भी धूमिल किया गया है। विभाग ने आरोपी को सख्त चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि भविष्य में ऐसा दोबारा किया गया, तो FIR दर्ज कर कठोर कार्रवाई की जाएगी।

 

गौरतलब है कि गज किला रतनपुर का एक ऐतिहासिक स्मारक है, जो कलचुरी राजवंश के शासनकाल की धरोहर के रूप में जाना जाता है। यह किला भारतीय पुरातत्त्व सर्वेक्षण (ASI) द्वारा राष्ट्रीय महत्व के स्मारक के रूप में संरक्षित है। यहां लगाए गए बोर्ड पर स्पष्ट रूप से लिखा है कि यह क्षेत्र सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के अंतर्गत संरक्षित है।

 

इस घटना ने न केवल स्थानीय स्तर पर हलचल मचा दी है, बल्कि राजनीतिक गलियारों में भी चर्चा का विषय बन गई है कि आखिर कानून की धज्जियां उड़ाकर कोई नेता किस आधार पर “संरक्षित स्मारक” में खुदाई का साहस कर सकता है।

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